ट्रकों को पास कराने को लेकर की जा रही थी वसूली
उन्नाव, समृद्धि न्यूज। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने देर रात एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया, जिसमें परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों को पास कराने का काम किया जा रहा था । एसटीएफ ने गदनखेड़ा बाईपास पर छापेमारी कर पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। जिनके पास से 13,800 रुपये नकद, सात मोबाइल फोन, एक ट्रक, एक मारुति फ्राक्स और एक किया कैरेन्स कार बरामद की गई।
जानकारी के अनुसार एसटीएफ कानपुर यूनिट के उपनिरीक्षक राहुल परमार को मुखबिर से सूचना मिली कि जनपद में परिवहन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध खनन और ओवरलोडिंग का धंधा चल रहा है। बीती रात करीब दो बजे मुखबिर ने बताया कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति शुक्लागंज से लखनऊ की ओर दो कारों से आ रहे हैं, जो ट्रकों को पास कराने के लिए धन वसूलते हैं।
सूचना पर उपनिरीक्षक राहुल परमार, मुख्य आरक्षी देवेश द्विवेदी, अशोक राजपूत, अरविंद सिंह, कमांडो राधेलाल और चालक शिवकुमार के साथ सरकारी वाहन से मौके पर पहुंचे। गदनखेड़ा बाईपास ओवरब्रिज पर दो संदिग्ध कारें दिखीं, जिन्हें घेरकर जांच शुरू की गई। मारुति फ्राक्स कार से बैठे मो. तारिक हुसैन (26) निवासी हिरननगर, उन्नाव और नियाज अहमद उर्फ अमन (25) को पकड़ा गया।
तारिक से दो मोबाइल और 7000 रुपये बरामद हुए। पूछताछ में उसने बताया कि वह ARTO संजीव कुमार, हमराही सिपाही प्रदीप और रंजीत, ARTO प्रतिभा गौतम के हमराही इंद्रजीत और PTO सैफर किदवई के ड्राइवर सुरेंद्र को प्रति ट्रक 2500 रुपये देता है।
उसने यह भी बताया कि कानपुर के पूर्व ARTO अम्बुज सिंह के साथ चलने वाले व्यक्ति निर्भय सिंह को 11,000 रुपये प्रति ट्रक दिए जाते हैं।
तारिक के पास 350 ट्रकों की व्हाट्सएप सूची मिली, जिन पर कोई चालान नहीं होता था।
नियाज अहमद ने स्वीकार किया कि वह दो साल से यह काम कर रहा है और प्रति ट्रक 7000 से 11,000 रुपये तक की उगाही करता है। वह अपने UPI नंबर से ट्रक मालिकों से पैसा लेकर अधिकारियों तक पहुंचाता था।
इसी दौरान मौके पर पहुंचे ट्रक के ड्राइवर श्रीकिशन (32) निवासी हमीरपुर को भी गिरफ्तार किया गया।उसने बताया कि वह कबरई (महोबा) से गिट्टी लेकर आया था और तारिक हुसैन से फोन पर लोकेशन लेता था। हर ट्रिप के लिए वह 300 रुपए बतौर कमीशन देता था।
किया कैरेन्स कार से दो और गिरफ्तार, व्हाट्सएप सूची से बचते थे चालान, दूसरी कार से सुनील सचान (45) और प्रदीप सिंह (32), दोनों निवासी घाटमपुर (कानपुर) पकड़े गए।
सुनील ने बताया कि वह कानपुर ARTO कार्यालय के अधिकारियों से मिलकर ट्रक पास कराता था।
प्रति ट्रक 11,000 रुपए निर्भय सिंह को देता था और बदले में वॉट्सऐप पर “नो चालान लिस्ट” भेजी जाती थी।
प्रदीप सिंह ने स्वीकार किया कि वह लोकेशन ट्रैकिंग का काम करता था और एक रात के लिए 3000 रुपए पर साथ गया था।
पूछताछ में सभी अभियुक्तों ने कबूल किया कि वे पिछले दो साल से खनन और परिवहन विभाग की मिलीभगत से यह नेटवर्क चला रहे थे। गिरोह कानपुर, उन्नाव, महोबा समेत कई जिलों में सक्रिय था और हर महीने ट्रक मालिकों से लाखों रुपये की उगाही करता था।
सभी अभियुक्तों के विरुद्ध थाना कोतवाली सदर, उन्नाव में धारा 59/61(2)/318/303(2) BNS व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(A)/12 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बरामद वाहनों, नकदी और मोबाइलों को पुलिस लाइन मालखाने में जमा कराया गया।
एसटीएफ उपनिरीक्षक राहुल परमार ने कहा कि यह कार्रवाई ओवरलोडिंग और अवैध खनन के बड़े नेटवर्क का खुलासा है। शासन के निर्देश पर राजस्व चोरी और भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
