सीजफायर के बावजूद गाजा पर इजरायल के हवाई हमले, 24 की मौत

समृद्धि न्यूज। गाजा में संघर्ष विराम के बावजूद इजरायली हवाई हमले में २४ लोगों की जान चली गई। इस घटना ने संघर्ष विराम की नाजुकता को उजागर कर दिया है। लगातार हो रही हिंसा के कारण क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। गाजा में शनिवार का दिन फिर तनाव और खौफ से भरा हुआ था। सुबह शुरू हुई गोलियों की आवाज दोपहर तक बड़े धमाकों में बदल गई। इजरायल डिफेंस फोर्सेज ने कई इलाकों पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों के बीच हमास ने भी चेतावनी दे डाली कि अगर हमला जारी रहा तो वह 10 अक्टूबर से चल रहे नाजुक सीजफायर को खत्म करने पर मजबूर हो सकता है। हालांकि बाद में संगठन के एक प्रवक्ता ने युद्धविराम खत्म करने की रिपोर्ट से इनकार किया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर ने दावा किया कि इन ताजा स्ट्राइकों में हमास के पांच वरिष्ठ सदस्य मारे गए। जिन्होंने संघर्षविराम के बावजूद इजराइल-नियंत्रित क्षेत्र में घुसकर सैनिकों पर गोली चलाई। सेना ने इस घटना को सीजफायर का गंभीर उल्लंघन बताया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि कार्रवाई में हमास के पांच वरिष्ठ सदस्य मारे गए, जबकि हमास ने आरोप लगाया कि इजराइल बहाने बनाकर युद्ध फिर शुरू करना चाहता है। सूत्रों की माने तो एक अमेरिकी अधिकारी ने भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इन कार्रवाइयों का समर्थन करता है। वहीं गाजा के हमास-प्रशासित सिविल डिफेंस ने 24 लोगों की मौत की जानकारी दी। तनाव की शुरुआत सुबह हुई, जब दक्षिण गाजा में एक फिलिस्तीनी बंदूकधारी ने इजरायली सैनिकों पर गोलियां चलाईं। यह घटना यलो लाइन के पास हुई, जहां से गाजा का नियंत्रण क्षेत्र इजरायल और हमास के बीच बंटा है। अमेरिका द्वारा कराए गए युद्धविराम के बावजूद इजराइल अब तक गाजा में 394 हमले कर चुका है, जिनमें 300 से अधिक लोग मारे गए और करीब 700 से ज्यादा घायल हुए। इससे पहले बुधवार को भी आईडीएफ ने गाजा में हमले कर 25 लोगों को मार दिया था, जब इजराइल ने दावा किया कि हमास ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है। वहीं गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब तक 69,733 लोग मारे जा चुके हैं और 1.7 लाख से ज़्यादा घायल हुए हैं। मंत्रालय महिलाओं और बच्चों को बड़ी संख्या में हताहत बताता है। संघर्षविराम के दौरान भी मौतों का आंकड़ा बढ़ा है, क्योंकि नए हमलों के अलावा मलबे से पुराने शव भी निकाले जा रहे हैं।

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