बीएसएफ ने कहा-ऑपरेशन सिंदूर 2.0 को तैयार, पाकिस्तान ने सीमा से हटाए 72 आतंकी लांचपैड

समृद्धि न्यूज। बीएसएफ जम्मू फ्रंटियर के आईजी शशांक आनंद ने कहा ऑपरेशन सिंदूर बंद नहीं, बल्कि स्थगित हुआ है। मौका मिला तो पिछली बार से और अधिक नुकसान पहुंचाएंगे। दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देंगे। बीएसएफ के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान में भारी तबाही की, जिसमें 118 चौकियां नष्ट हुईं। इसके बाद पाकिस्तान ने 72 से ज्यादा आतंकी लांचपैड हटा दिए। बीएसएफ ने कहा कि वे किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं और दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। ऑपरेशन सिंदूर में करारी शिकस्त से खौफ में आए पाकिस्तान ने अपने 72 से अधिक आतंकी लॉन्चपैड को भारतीय सीमा से और दूर स्थानांतरित कर दिया है। हालांकि पाकिस्तान की करतूतों को देखते हुए बीएसएफ ने कहा कि उसकी दुश्मन के हर पैंतरे पर कड़ी नजर है। अगर सरकार ऑपरेशन सिंदूर 2.0 शुरू करने का फैसला करती है, तो बीएसएफ शत्रु को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार है।
आइजी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आपरेशन सिंदूर से हमने पड़ोसी मुल्क को सबक सिखाया है कि अगर वह भविष्य में कोई दुस्साहस करेगा या आतंकी हमला होगा तो उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। हमने उनके निगरानी तंत्र को भी नष्ट किया। हमारे जवान और अधिकारी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और समर्थ हैं। सेना, पुलिस व अन्य सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय में दुश्मन की हर हरकत की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आपरेशन सिंदूर शुरू किया। हमने पाकिस्तान स्थित केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन पाकिस्तान ने इसे युद्ध का रूप देते हुए भारत पर हमला किया। बीएसएफ ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए जम्मू संभाग में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पाकिस्तान की सौ से अधिक चौकियों को नष्ट किया। हमारे जवानों ने अग्रिम मोर्चे पर रहते हुए न सिर्फ दुश्मन के इरादें को विफल बनाया बल्कि सीमांतवासियों के बीच सुरक्षा व विश्वास की भावना को मजबूत बनाया। अपनी जान की परवाह किए बिना सीमा पर डटे रहे। सियालकोट और जफरवाल के अंदरूनी इलाकों में आतंकियों के करीब 12 लॉन्चपैड सक्रिय हैं, जबकि अन्य 60 लॉन्चपैड भी काम कर रहे हैं। लॉन्चपैड में मौजूद आतंकियों की संख्या बदलती रहती है। वे वहां स्थायी रूप से नहीं रहते। दो तीन की संख्या में आतंकियों को घुसपैठ कराते समय ये लॉन्चपैड सक्रिय होते हैं। मौजूदा समय में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में कोई प्रशिक्षण शिविर नहीं है। पहले जैश के लोग निचले और लश्कर के लोग ऊंचाई वाले इलाकों में सक्रिय रहते थे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों ने संयुक्त दल बनाया है, जिसमें कोई भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है।

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