शाहाबाद (हरदोई)। उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायत अधिकारी संघ एवं उत्तर प्रदेश ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर सोमवार को शाहाबाद ब्लॉक मुख्यालय पर ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना दिया। ब्लॉक शाहाबाद के सभी ग्राम सचिव अपने-अपने गांवों से साइकिल चलाकर मुख्यालय पहुंचे। सचिवों का यह साइकिल मार्च किसी प्रचार कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, बल्कि सरकार से लंबे समय से लंबित भत्ते में बढ़ोतरी की मांग को लेकर एक सांकेतिक प्रदर्शन था।
सुबह लगभग 10 बजे के आसपास अलग-अलग मार्गों से दर्जनों ग्राम सचिव साइकिलों पर ब्लॉक परिसर में दाखिल हुए। सचिवों को रोजमर्रा की सरकारी पत्रावली, फाइलें और लैपटॉप से भरे बैग के साथ साइकिल चलाते देख कई कर्मचारी और आम नागरिक दंग रह गए। कुछ लोग तो यह नज़ारा देखकर पूछते भी नज़र आए कि “अचानक सचिव साइकिल से क्यों आ रहे हैं?” इस प्रदर्शन के साथ सचिवों ने साफ संदेश देने की कोशिश की — जब सरकार साइकिल भत्ता दे रही है, तो अब सभी अधिकारी सरकारी काम साइकिल से ही करेंगे।
ब्लॉक शाहाबाद के अध्यक्ष मोहित पाठक ने बताया कि प्रादेशिक संगठन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में यह सांकेतिक आंदोलन चलाया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार के द्वारा सचिवों को मिलने वाला यात्रा भत्ता वर्षों पुराना है और मौजूदा परिवेश में यह राशि अत्यंत अपर्याप्त है। उन्होंने कहा, “जब हमसे फील्ड में काम करने, गांव-गांव जाने और विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग की अपेक्षा की जाती है, तो सुविधाओं और भत्तों में भी न्यायसंगत वृद्धि होनी चाहिए। सरकार साइकिल का ही भत्ता दे रही है, इसलिए अब हम गांव के काम से लेकर कार्यालय पहुँचने तक साइकिल का ही इस्तेमाल करेंगे।”
सचिवों का कहना है कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं के तल पर सबसे अधिक दायित्व ग्राम सचिवों पर होता है। उनके माध्यम से गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा, वृद्धावस्था पेंशन, विवाह सहायता, स्वरोजगार योजनाएँ, सड़क एवं विकास कार्यों सहित प्रत्येक सरकारी कार्यक्रम की निगरानी और क्रियान्वयन होता है। ऐसे में निरंतर फील्ड कार्य और बार-बार कार्यालयों तक आवागमन के लिए उचित यात्रा भत्ता न मिलना व्यावहारिक तौर पर अनुचित और कर्मचारी हितों की अनदेखी है।
प्रदर्शन के दौरान सचिवों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार या प्रशासन को असहज करना नहीं है, बल्कि अपनी वास्तविक मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखना है। सचिवों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी परेशानी को समझेगी और शीघ्र ही भत्ते में बढ़ोतरी तथा अन्य लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।
सचिवों का साइकिल धरना प्रदर्शन लगभग दो घंटे चला, जिसके बाद सभी ने सामूहिक रूप से ज्ञापन तैयार किया। ज्ञापन शासन तक पहुंचाए जाने के लिए जिला कमेटी को सौंपा गया। अंत में सचिव साइकिलों से वापस अपने-अपने गांवों के लिए रवाना हो गए।
इस अनोखे तरीके से किए गए आंदोलन ने न सिर्फ कर्मचारियों के मनोबल और एकजुटता को प्रदर्शित किया, बल्कि शासन-प्रशासन का ध्यान भी मजबूती से अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया। ग्रामीण विकास की आधारशिला माने जाने वाले ग्राम सचिवों ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि सम्मानजनक भत्ता और सुविधाएं केवल मांग नहीं, बल्कि कार्य निष्पादन की मजबूरी भी हैं।
