घर के बंटवारे को लेकर देवर ने भाभी को उतारा मौत के घाट

उन्नाव, समृद्धि न्यूज। सोहरामऊ थाना क्षेत्र में पारिवारिक कलह के चलते एक महिला की देवर ने हथौड़े से वार कर हत्या कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

जानकारी के अनुसार, सोहरामऊ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोडवा मजरा लालाखेड़ा में पुस्तैनी मकान के बंटवारे को लेकर चल रहा विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। घटना इतनी हृदयविदारक है कि जिसने भी सुना, वह स्तब्ध रह गया।
सुनीता (45 वर्ष) पत्नी नरेश का अपने देवर रामू पुत्र गंगाराम से घर के हिस्से को लेकर दोपहर में विवाद हो गया। विवाद के दौरान आरोपी देवर ने खुलेआम धमकी दी, जिससे डरी-सहमी सुनीता ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस से अपनी जान बचाने की गुहार लगाई।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद हालात सामान्य रहे और पुलिस टीम मौके से वापस लौट गई। लेकिन पुलिस के वापस जाते ही हालात फिर बिगड़ गए।
बताया जा रहा है कि घटना के समय महिला का पति नरेश रोज़गार के सिलसिले में घर से बाहर गया हुआ था। इसी का फायदा उठाकर आरोपी देवर ने आपा खो दिया और पास में पड़े हथौड़े से सुनीता पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। अचानक हुए इस हमले में वह लहूलुहान होकर गिर पड़ी और मौके पर ही उसकी हालत गंभीर हो गई।

चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और परिजन महिला को आनन-फानन में नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महिला की मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया और गांव में सनसनी फैल गई।

घटना की सूचना पर सोहरामऊ थाना पुलिस के साथ-साथ अजगैन कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

इस संबंध में क्षेत्राधिकारी हसनगंज अरविंद कुमार चौरसिया ने बताया कि मामले में आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी घटना के बाद से फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं। जल्द ही गिरफ्तारी कर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस कुछ देर और मौके पर रहती या विवाद की गंभीरता को समझती, तो शायद एक महिला की जान बचाई जा सकती थी। यह वारदात पुलिस व्यवस्था और पारिवारिक विवादों में समय पर ठोस कार्रवाई की जरूरत पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

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