लखनऊ, समृद्धि न्यूज। केजीएमयू में धर्मांतरण के आरोप का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर को निलंबित कर मुकदमा दर्ज किया गया है। विशाखा कमेटी जांच कर रही है और आरोपी से कुंवारा होने के सबूत मांगे गए हैं। लखनऊ के केजीएमयू में लव जिहाद के आरोपी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है। डॉक्टर पर आरोप है कि उसने अपनी शादी की बात छिपाकर एक हिंदू लडक़ी पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। इस मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को निलंबित कर दिया है। प्रो0 आतम ने पत्र में लिखा है कि यौन उत्पीडऩ की शिकायत का संज्ञान आंतरिक समिति ने लिया है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए समिति ने कहा है कि जांच लंबित रहने के दौरान जूनियर रेजिडेंट ड्यूटी पर बने रहकर निष्पक्ष और तटस्थ जांच प्रभावित कर सकता है। प्रो0 आतम ने जूनियर रेजिडेंट को निर्देश दिए हैं कि निलंबन की अवधि के दौरान वह केजीएमयू मुख्यालय में उपस्थित रहेगा, लेकिन कोई भी आधिकारिक कार्य नहीं करेगा। पूर्व में लिखित अनुमति के बिना विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करेगा। वह केवल जांच कार्यवाही में ही शामिल हो सकेगा। बताते चले कि पीडि़त महिला डॉक्टर ने खुद मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई। पीडि़ता का आरोप है कि रमीजुद्दीन नायक अकेला नहीं है, बल्कि वह केजीएमयू परिसर में एक पूरा गैंग चला रहा है जो धर्मांतरण के काम में जुटा है। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केजीएमयू प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस पूरे प्रकरण में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा और एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
