संभल: संभल में 12 पुलिसकर्मी फर्जी एनकाउंटर में फंस गए हैं। जेल में निरुद्ध व्यक्ति को फर्जी मुठभेड़ और झूठी विवेचना के जरिए लूट के मामले में जेल भेजने के प्रकरण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से तत्कालीन बहजोई थाना प्रभारी सहित 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिया था। इस आदेश के दायरे में आए कई अधिकारी और कर्मचारी वर्तमान में जनपद संभल में तैनात नहीं हैं। संभल पुलिस अपने ताबड़तोड़ एक्शन को लेकर पूरे यूपी में चर्चा का विषय बनी रही। कोर्ट ने 2 इंस्पेक्टर, 4 दारोगा, 5 सिपाही और एक हेड कांस्टेबल पर एफआईआर के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इन पुलिसवालों पर केस दर्ज कर तीन दिन में जानकारी दी जाए, लेकिन इन सबके बीच संभल के सिंघम एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने भी साफ कर दिया है कि हम अपने जवानों पर केस दर्ज नहीं करेंगे, बल्कि कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। वहीं पुलिस को गुरुवार शाम तक न्यायालय के आदेश की प्रति न मिल पाने के कारण इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी। तत्कालीन बहजोई थाना प्रभारी निरीक्षक पंकज लवानिया का इस दौरान डिप्टी एसपी पद पर प्रमोशन हो चुका है और वह पहले प्रयागराज स्थानांतरित हुए थे जबकि वर्तमान में मेरठ में भवाना सर्कल में सीओ के पद पर तैनात हैं।
जानकारी के मुताबिक, ओमवीर नामक युवक को 25 अप्रैल 2022 को बहजोई थाना क्षेत्र में हुई एक लाख रुपए की डकैती में गिरफ्तार दिखाया गया था, जबकि वह उस समय बदायूं जेल में बंद था। 11 अप्रैल से 12 मई 2022 तक बदायूं जेल में रहने के बावजूद बहजोई थाना पुलिस ने 7 जुलाई को फर्जी मुठभेड़ में उसकी गिरफ्तारी दिखाई, जिसमें 19 बाइकें, लूटी गई राशि की बरामदगी के अलावा धीरेंद्र और अवनीश नाम के दो अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी दिखाई गई। ओमवीर का दावा है कि वह 11 अप्रैल से 12 मई 2022 तक बदायूं जेल में बंद था और 12 मई को ही रिहा हुआ था, ऐसे में 25 अप्रैल को डकैती में शामिल होना असंभव था। इसको लेकर ओमवीर ने चंदौसी जिला न्यायालय में याचिका दायर की। ओमवीर की तरफ से अधिवक्ता सुकांत कुमार ने कोर्ट में केस लड़ा। याचिका में तत्कालीन बहजोई थाना प्रभारी पंकज लवानिया, क्राइंम ब्रांच इंस्पेक्टर राहुल चौहान, दारोगा प्रबोध कुमार, नरेश कुमार, नीरज कुमार और जमील अहमद, सिपाही वरुण, आयुष, राजपाल, मालती चौहान, दीपक कुमार, हेड कांस्टेबल रूप चंद्र और एक अन्य दुर्वेश के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए। अधिवक्ता सुकांत कुमार ने बताया कि ओमवीर अप्रैल 2022 में बदायूं जेल में बंद था। बहजोई पुलिस ने उसे डकैती की वारदात में शामिल दिखाकर फर्जी मुठभेड़ में गिरफ्तार दर्शाया। पुलिस ने न सिर्फ गिरफ्तारी दिखाई बल्कि लूट की राशि की बरामदगी भी दर्शाते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी।
संभल: फर्जी एनकाउंटर में फंस गए 12 पुलिसकर्मी, एफआईआर के आदेश
