
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। अधिवक्ता संघ के सचिव व उपाध्यक्ष ने प्रशासनिक न्यायामूर्ति से शिष्टाचार भेंटकर चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
शनिवार को जनपद प्रथम आगमन पर आये प्रशासनिक न्यायामूर्ति डॉ0 योगेन्द्र कुमार श्रीवास्तव से अधिवक्ता संघ के सचिव राजेश कुमार अग्निहोत्री व उपाध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता ने शिष्टाचार भेंटकर चार सूत्रीय ज्ञापन दिया। जिसमें दर्शाया कि जनपद के व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ प्रभाग फर्रुखाबाद की एक त्वरित न्यायालय तथा दो अतिरिक्त न्यायालय पीठासीन अधिकारी न होने के कारण रिक्त है। जिससे मूल व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ प्रभाग के न्यायालय में कार्य की अधिकता एवं प्राचीन वादो के निस्तारण में अधिवक्तागण एवं वादकारियों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। रिक्त न्यायालयों में पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति कराये जाने की मांग की। व्यवहार न्यायाधीश क0प्र0 के कई न्यायालय में पीठासीन अधिकारी के न होने के कारण रिक्त है। जिससे कार्यरत न्यायालय में वादों की अधिकता होने के कारण कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। उ0प्र0 किरायेदारी, बेदखली अधिनियम २०२१ में अधिकरण के गठन में आवेदन पत्रों को निस्तारण का जो अधिकार जिलाधिकारी/अपर जिलाधिकारी को दिया गया है वह विधिसम्मत एवं उचित नहीं है। डीएम व एडीएम के प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहने तथा विधि की जानकारी के आभाव में आवेदन पत्रों का निस्तारण करने में कठिनाईयों को सामना अधिवक्तागणों को करना पड़ता है। जिससे वादकारी का हित प्रभावित होता है। न्यायिक दण्डाधिकारी स्तर पर प्रतिभूति का सत्यापन उच्च न्यायालय द्वारा जारी शासनादेश जिसमें पांच जघन्य अपराधों में २५ हजार रुपये से अधिक की राशि का पुलिस एवं तहसील से कराये जाने का उल्लेख है। परन्तु सामान्य रुप से प्रचलित प्रतिभूति २५ हजार रुपये से ऊपर के सत्यापन की परम्परा चल रही है। उससे भी वादकारी एवं अधिवक्तागणों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है तथा सत्यापन के आभाव में वादकारी को कारागार में निरुद्ध रहना पड़ रहा है। जिससे उनके असंवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे है। अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन में यह भी मांग रखी कि संज्ञान में यह भी आया है कि जनपद न्यायालय का परिसर मुख्यालय से दूरस्थ स्थान पर निर्मित किये जाने हेतु स्थान की तलाश ग्राम पपिहापुर वर्नाबुजुर्ग तहसील सदर की जा रही है, इन स्थानों को छोडक़र न्यायालय की पूर्व सीमा अग्निसमन यंत्र स्थापित है के पास राज्य सरकार की कई बीघा जमीन रिक्त पड़ी है, जो सुगमता से राज्य सरकार से प्राप्त हो सकती है। जिसके कुछ अंश को पूर्व में अग्निशमन यंत्र हेतु प्राप्त की गई है और धन का अपव्यय भी रोका जा सकता है तथा पूरब दिशा स्थित न्यायालय परिसर में ही प्रांगण को विकसित किया जा सकता है।
