अनुराग दुबे न्यायालय में हाजिर, वारंट व धारा 82 की कार्यवाही निरस्त

अगली तिथि पर उच्च न्यायालय का स्थगनादेश प्रस्तुत नहीं किया तो कोई हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र नहीं किया जायेगा स्वीकार
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। हत्या के प्रयास के मामले में फरार चल रहे अभियुक्त अनुराग दुबे उर्फ डब्बन अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपर जनपद न्यायाधीश की अदालत में हाजिर हुए। अपर जनपद न्यायाधीश कक्ष संख्या-1 न्यायाधीश शैली रॉय ने सुनवाई करते हुए अनुराग दुबे का वारंट व धारा 82 की कार्यवाही निरस्त करते हुए अगली तिथि 10 दिसम्बर की नियत की है। न्यायाधीश ने आदेश दिया है कि अगली तिथि को कोई स्थगनादेश प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो उन्हे आगे और अवसर प्रदान नहीं किया जायेगा और किसी भी अभियुक्त का कोई हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किया जायेगा।
अभियुक्त अनुराग दुबे अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित हुए। अभियुक्त अनुराग दुबे की ओर से वकालतनामा प्रस्तुत किया गया।
अभियुक्तगण गौरव गुप्ता पुत्र हरीबाबू गुप्ता, संदीप पाठक, गौरव गुप्ता पुत्र वीरेन्द्र गुप्ता का हाजिरी माफी प्रार्थनापत्र अधिवक्ता के माध्यम प्रस्तुत किया गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकृत कर लिया। शेष अभियुक्तगण उपस्थित अभियुक्तगण गौरव गुप्ता पुत्र हरीबाबू गुप्ता, संदीप पाठक, गौरव गुप्ता पुत्र वीरेन्द्र गुप्ता की और से स्थगन प्रार्थनापत्र के साथ उच्च न्यायालय इलाहाबाद में प्रस्तुत पिटीशन अन्तर्गत धारा 482 दं0प्र0सं0 संख्या 37488/2024 का स्टेटस जो आनलाइन निकाला गया है प्रस्तुत कर कहा गया कि न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध पिटीशन प्रस्तुत है। जिसमें अग्रिम तिथि सुनवायी हेतु नियत है। याचना की गयी कि उक्त पिटीशन के निस्तारण तक उक्त प्रकरण में आरोप विरचित न किया जाए। अभिषेक दुबे ने प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर कथन किया गया कि उसने उच्च न्यायालय में डिस्चार्ज पिटीशन संस्थित की गयी है जिसमें अग्रिम तिथि 3 दिसम्बर नियत है। उक्त पिटीशन की सुनवायी हेतु उक्त मामले में तब तक आरोप विरचित न किया जाए। प्रार्थनापत्र के साथ उच्च न्यायालय का स्टेटस रिपोर्ट की कम्प्यूटर की प्रति प्रस्तुत की गयी है। उ0प्र0 राज्य की ओर से विद्वान अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौ0 की ओर से प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर कथन किया गया कि अभियुकगण प्रस्तुत प्रकरण में ऐनकेन प्रकारेण प्रकरण की कार्यवाही को स्थगित करना चाहते हैं तथा जानबूझकर मुकदमें में किसी न किसी आधार पर आरोप विरचित होने नहीं देना चाहते। उच्च न्यायालय से कोई स्थगन आदेश अभियुक्तगण को प्रदान नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में अभियुक्तगण के विरुद्ध आरोप विचरित किया जाये। अभियुक्तगण की ओर से दिये गये प्रार्थनापत्रों पर भी विद्वान अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौ0 की ओर से आपत्ति का पृष्ठांकन किया गया है। सुना एवं पत्रावली का अवलोकन किया।
प्रस्तुत प्रकरण में अभियुक्तगण का डिस्चार्ज प्रार्थनापत्र काफी समय पूर्व निरस्त किया जा चुका है। जिसके विरूद्ध अभियुक्तगण की ओर से उच्च न्यायालय इलाहाबाद में पिटीशन संस्थित होना बताया गया है, परन्तु अभियुक्तगण की ओर से उच्च न्यायालय इलाहाबाद से प्रस्तुत प्रकरण की अग्रिम कार्यवाही सम्पादित करने हेतु कोई भी स्थगनादेश प्रस्तुत नहीं किया गया है और न ही यह अवगत कराया गया कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद से प्रस्तुत प्रकरण की अग्रिम कार्यवाही को स्थगित किया गया है। ऐसी स्थिति में न्यायहित में अभियुक्तगण को एक अवसर और प्रदान किया जाना न्यायसंगत है। यहाँ यह भी स्पष्ट किया जाना उचित होगा कि अभियुक्तगण को उक्त सम्बन्ध में विगत कई तिथि पर भी समय प्रदान किया जा चुका है। न्यायाधीश ने अभियुक्तगण को अन्तिम अवसर प्रदान करते हुए आदेशित किया कि यदि उनके द्वारा अग्रिम नियत तिथि को कोई स्थगनादेश प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो उन्हें आगे और अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा और किसी भी अभियुक्त का कोई हाजिरी माफी प्रार्थनापत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा। सुनवाई के लिए अगली तिथि १० दिसम्बर की नियत की गई है।

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