
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। रामलीला मण्डल सरस्वती भवन द्वारा आयोजित लीला में रामबाग में ताड़का वध व अहिल्या उद्धार लीला का मंचन हुआ। विश्वामित्र जब असुरों से परेशान हुए तो वह अयोध्या पहुंचकर राम और लक्ष्मण को वन ले जाने के लिए मांगने आये। दशरथ ने कहा कि राम-लक्ष्मण मेरे प्राण है। इन्हें मैं नहीं भेज सकता। बदले में सारी सम्पत्ति ले लो। यह बात सुनकर विश्वामित्र ने नाराज होते हुए कहा कि मैं ऋषि हूं मुझे निषाचरों का उद्धार करना है आप अपने पुत्रों को नहीं भेज सकते तो मेरे यहां आने का औचित्य क्या है, तभी विशिष्ट मुनी आये उन्होंने विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण को भेजने के लिए दशरथ से कहा और वह मान गये। वन में जाते समय निषाचरों ने फिर उत्पात मचा दिया। ताड़का ने राम-लक्ष्मण पर प्रहार करना चाहां, तभी उन्होंने अपने वाणों से ताड़का को छलनी कर वध कर दिया। इससे समस्त ऋषि को निषाचरों से मुक्ति मिली। वहीं राम और लक्ष्मण को अहिल्या मिली। उन्होंने उनका उद्धार किया। इस मौके पर पात्रों ने अपना अभिनय किया।
