
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। पर्यावरण संरक्षण का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए पर्यावरण या प्राकृतिक ंसंसाधनों की रक्षा करना है। इस सदी में हम लोग विकास के नाम पर पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचा रहे है। अब ऐसी स्थिति में पहुंच गये है कि हम पर्यावरण संरक्षण के बिना इस गृह पर लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकते है। पर्यावरण संरक्षण का तात्पर्य है कि हम अपने चारों ओर के वातावरण को संरक्षित करें तथा उसे जीवन के अनुकूल बनाये रखे, क्योंकि पर्यावरण और प्राणी एक दूसरे पर आश्रित है। अधिक जन संख्या, जल साइंटिफिक इश्यूज, ओजोन डिप्लेशन, ग्लोबल वार्मिंग से लेकर वनों की कटाई, डिजर्टिफिकेशन और प्रदूषण तक के मानव जाति के लिए गंभीर खतरा है। कानोडिया बालिका इंटर कालेज के वरिष्ठ लिपिक अजंट सिंह गुड्डू बाबू अपने घर में रोजाना पौधों को संरक्षित करते है।साफ सफाई के साथ उन्हे सींचते है। इसी तरह वह विद्यालय में भी पर्यावरण के प्रति शिक्षिकाओं व छात्राओं को प्रेरित करते है। छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण एवं उनके विकास के लिए जागरुकता पैदा करने के लिए विद्यालय में उद्देश्यों को पुर्नस्थापित करने पर जोर देते हैं। शुद्ध सामाजिक पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों से हमें अधिकतम लाभ प्राप्त हो रहा है। अत: इसमें विशेष रुप से स्थानीय परिस्थितिगी प्रणाली के संतुलन को बनाये रखने का कर्तव्य निभाना चाहिए। मनुष्य बुद्धिजीवी प्राणी है। अत: इसमें आशा की जाती है कि वह प्राकृतिक साधनों को अपनी आवश्यकता के अनुरुप संतुलित करके और उनके वैकल्पिक साधनों को ढूंढें। जिससे प्राकृतिक साधन नष्ट न हो पायें और परिस्थितिगी का संतुलन बना रहे। मानव की आवश्यकताओं, प्राकतिक साधन के दोहन की क्षमताओं और पर्यावरण के बीच समायोजन होना आवश्यक है। अत: विद्यालयों में मानव एवं पर्यावरण के महत्व को समझाते हुए उन दोनों को सामंजस्य स्थापित किया जाना चाहिए, क्योंकि इन दोनों को एक व्यवस्था में रखकर ही खुशहाल रहा जा सकता है। विद्यालय की प्रधानाचार्या सुमन त्रिपाठी भी पर्यावरण के प्रति सजग हैं। समय-समय पर जागरुकता रैली व गोष्ठी एवं शपथ ग्रहण आदि कार्यक्रम के साथ छात्राओं को जागरुक करती हैं। पर्यावरण के प्रहरी बने अजंट सिंह ुगुड्डू बाबू ने विद्यालय के समस्त स्टाफ व शिक्षिकाओं को प्रधानाचार्य की देखरेख में शपथ ग्रहण सम्पन्न करायी और उन्हें जागरुक किया।
