जिले में धूमधाम से मना भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्यौहार भाईदूज

जिला जेल गेट पर सुबह से लाइन में लग गयी थीं बहनें
खुली मिठाई अंदर ले जाने पर जेल प्रशासन ने लगाया प्रतिबंध
वाहनों पर भूसे की तरह भरकर चली सवारियां, डग्गामार वाहनों की रही चांदी
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। दीपावली के बाद पडऩे वाले बहन भाई के प्रेम के प्रतीक त्योहार भैयादूज की धूम सुबह से ही नगर में दिखायी देती रही। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सर्वत्र विजय की कामना की। वहीं भाइयों ने बहनों को उपहार दिये।पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य की पत्नी संज्ञा की 2 संतानें थीं। पुत्र यमराज तथा पुत्री यमुना। यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थीं। यमुना यमराज को अपने घर पर आने के लिए आमंत्रित करतीं, लेकिन व्यस्तता के कारण यमराज उसके घर न जा पाते थे। एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर अचानक से जा पहुँचे। बहन के घर जाते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कराया। बहन यमुना ने अपने भाई का दिल से आदर सत्कार किया। तरह-तरह के व्यंजन बनाकर उन्हें भोजन कराया और भाल पर तिलक लगाया। जब यमराज वहां से चलने लगे तब उन्होंने यमुना से कोई भी मनोवांछित वर मांगने को कहा। यमुना ने कहाभैया यदि आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन हर साल आप मेरे यहां आया करेंगे। इसी प्रकार जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उसका आतिथ्य स्वीकार करे और इस दिन जो भी बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसे भोजन खिलाये उसे आपका भय न रहे। इसी के साथ यमराज ने यमुना को ये भी वरदान दिया कि यदि इस दिन भाई बहन यमुना नदी में डुबकी लगाएंगे तो उन पर मेरा प्रकोप नहीं रहेगा। यह कथा लोगों के द्वारा एक दूसरे को सुनायी गयी और पौराणिक परम्परा से जुड़े इस त्योहार को धूमधाम से मनाया गया। भाईदूज के अवसर पर जिला जेल गेट पर बहनें भारी संख्या में लाइन में लगी दिखायी दीं। सुबह होते ही बहनें लाइन में लग गयी थीं। जिला कारागार फतेहगढ़ के जेलर अखिलेश कुमार ने बताया कि खुली मिठाई अंदर ले जाने पर प्रतिबंध है, जबकि बंद मिठाई ले जा सकते हैं। अंदर जाकर बहनों ने भाइयों के तिलक किया और उनकी लंबी आयु की कामना की। इस दौरान बहनें भाइयों को देखकर भावुक हो गयीं। यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। वहीं त्योहार को देखते हुए बसों पर भी काफी भीड़भाड़ देखी गयी। ज्यादातर लोग अपने निजी वाहन से बहनों के घर गये। त्योहार को देखते हुए डग्गामार वाहनों की चांदी रही।

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