राजपूत रेजिमेंटल सेंटर में बाई एनियल कांफ्रेंस का हुआ समापन

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। भारतीय थल सेना में पश्चिमी कमान के पूर्व जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने फतेहढ़ स्थित राजपूत रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित बाई एनियल कांफ्रेंस के समापन पर पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने सेना के गैर राजनीतिक और गैर सांप्रदायिक चरित्र को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया तथा भविष्य की लड़ाइयों में ड्रोन युद्ध की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।
रविवार को लेफ्टिनेंट मनोज कुमार कटियार ने राजपूत रेजिमेंट के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट की बैटन लेफ्टिनेंट जनरल एस0एस0 साही को सौंपी। सम्मेलन के अंतिम दिन उन्होंने देश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और सेना की तैयारियों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं पर खतरा लगातार बना हुआ है। इसलिए ऑपरेशनल तैयारियों में किसी भी तरह की ढील स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना अब पहले से कई गुना बेहतर स्थिति में है। ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बताया कि पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों को उनके ठिकानों पर जाकर समाप्त किया गयाए जो सेना की बड़ी सफलता थी। उन्होंने भविष्य के युद्धों में ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका और उससे जुड़े प्रशिक्षण व सुरक्षा उपायों पर विशेष बल दिया। लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने दोहराया कि सेना का गैर राजनीतिक और गैर सांप्रदायिक स्वरूप ही उसकी असली शक्ति है। जिसे हर हाल में बनाए रखना चाहिए। उन्होंने राजपूत रेजिमेंटल सेंटर के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि यह केंद्र वर्ष 1921 से देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया कि देश के पहले कमांडर इन चीफ फील्ड मार्शल करिअप्पा इसी रेजिमेंट से थे। परमवीर चक्र से सम्मानित नायक नाथ सिंह के बलिदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि खजूरी में बना स्मारक उनके अदम्य साहस की स्मृति दिलाता है। जनरल ने बताया कि रेजिमेंट की 25 यूनिटें वर्तमान में पूर्वी लद्दाख, अरुणाचल और अन्य सीमाई इलाकों में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन आधारित युद्ध निर्णायक होंगे, इसलिए अग्निवीर सहित सभी स्तरों के प्रशिक्षण में ड्रोन संचालन और सुरक्षा उपायों पर ध्यान देना आवश्यक है।

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