साईं मीर ऑफ इंस्टीट्यूशन में गांधी व शास्त्री की मनायी गई जयंती

प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन
फर्रुखाबाद/छिबरामऊ, समृद्धि न्यूज। साईं मीर ऑफ इंस्टीट्यूशन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर हर्षोल्लास के साथ जयंती मनायी गई। इस दौरान प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि १९०६-०७ में दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी ने भारतीयों के लिए अनिवार्य पंजीकरण और पास के खिलाफ सत्याग्रह चलाया था। जब भी अंहिसा की बात आती है, तो महात्मा गांधी का नाम सबसे ऊपर आता है। अंहिसा का मतलब हर परिस्थिति में स्वयं और दूसरों का हानिरहित रखने से है। अंहिसा बापू की सबसे बड़ी शिक्षाओं में से एक थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी दिलाने के लिए महात्मा गांधी ने ८ अगस्त १९४२ को भारत छोड़ो आंदोलन शुरु किया था। इस अभियान में गांधी ने करो या मरो की बात कहीं थी। आज के ही पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी जयंती मनायी जाती है। लाल बहादुर शास्त्री ने देश को आजाद करवाने में कई महापुरुषों की तरह अपनी भूमिका निभाई। वे भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने और भारतीय राजनीति में अपनी अमिट छाव छोड़ी। उन्होंने देश को जय जवान जय किसान का नारा दिया, लेकिन उनके जीवत का अंत बहुत रहस्यमयी रहा। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में २ अक्टूबर १९०४ में हुआ था तथा डेढ़ साल की उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। उन्होंने ननिहाल में रहकर पढ़ाई पूरी की। १६ की उम्र में उन्होंने देश की आजादी की जंग में शामिल होने के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी। १७ साल की उम्र में उन्हें स्वतंत्रा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इस अवसर पर कॉलेज में सभी को नशा मुक्त समाज बनाने की भी शपथ दिलायी गई। विद्यार्थियों ने बापू लाल बहादुर शास्त्री की कहानियां सुनाई। इस अवसर पर कालेज के प्रशासनिक अधिकारी शशिभूषण सिंह, साईं मीर डिग्री कालेज के प्राचार्य मनोज दुबे, सार्इं मीर लॉ कालेज के प्राचार्य सुधीर बघेल, साईं मीर पॉलीटेक्निक के प्राचार्य विपिन बाथम, साईं मीर कॉलेज आफ फॉर्मेसी के प्राचार्य डा0 अर्पित कटियार व स्टाफ मौजूद रहा।

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