
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में गौरव दिवस के रूप में मनायी गयी। सभागर में उपस्थित अधिकारी/कर्मचारीयों द्वारा भगवान विरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।मुख्य विकास अधिकारी द्वारा बताया गया कि कितनी कम उम्र में आदिवासियों को संगठित कर उनके द्वारा आंदोलन चलाया गया। झारखंड, बिहार और ओडिशा के एक बड़े हिस्से में इन्हें भगवान बिरसा कहा जाता है। ये अकेले आदिवासी नेता हैं जिनका चित्र भारतीय संसद में प्रदर्शित है। ये मुंडा जाति ही नहीं, आदिवासी या अनुसूचित जनजातीय गौरव के सबसे बड़े प्रतीक हैं। इनका जन्म झारखंड राज्य के खूंटी जिले के उलिहातू में हुआ था। 15 नवंबर 1875 को बिरसा मुंडा का जन्म हुआ। 9 जून 1900 में रांची के कारागार में मृत्यु हुई। करीब 19वर्ष की आयु में उन्होंने बिरसा सेना का गठन किया। 600 से ज्यादा पारंपरिक लड़ाके उनके साथ थे। बिरसा मुंडा आदिवासी चिंतन, संस्कृति के साथ हिन्दू धर्म के ज्ञान और ईसाई धर्म के संगठन व्यवहार से प्रभावित थे। बिरसा मुंडा ने पारंपरिक सेना बनाकर अंग्रेजों और बाहरी लोगों से सीधे लड़ाई में उतरकर आदिवासियों का नेतृत्व किया। उनके ऊपर अंग्रेजों द्वारा उस समय 500 रुपए का इनाम रखा गया था तथा 25 वर्ष की उम्र में जेल में बीमारी से उनकी मृत्यु हो गई।
