सदैव व सभी के लिए अनुकरणीय है भ्राता भरत का चरित्र: सुरेन्द्र नाथ.

*श्रीमद् भागवत में श्रीकृष्ण की बाल लीलायें व कालिया दहन की सुनाई कथा
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज।
गंगा नगर में चल रही श्रीराम कथा एवं भागवत ज्ञान यज्ञ के छठे दिन भागवत कथाव्यास पंडित दाताराम अग्निहोत्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ ही कालिया नाग नाथने की कथा सुनाई। मानस विद्वान डा0 सुरेन्द्र नाथ द्विवेदी ने भरत चरित्र सुनाकर राम से अधिक रामकर दासा की चौपाई को सार्थक कर दिया।
भागवत कथाव्यास ने कहा कि बचपन में भगवान श्रीकृष्ण नटखट थे। वे गोपियों घरों में घुसकर माखन चोरी किया करते थे। एक दिन यमुना के किनारे गेंद खेलते-खेलते गेंद कालीदह में गिर गयी। बच्चों ने गेंद लाने के लिए जिद की तो भगवान श्रीकृष्ण नदी में कूद गये और उसमें रहने वाले कालिया नाग को नथकर गेंद निकाल लाये। गोपियों के साथ रास का वर्णन भी कथाव्यास ने किया। बैंगलोर से आये मानस प्रवक्ता डा0 सुरेन्द्र नाथ द्विवेदी ने कहा कि भगवान राम लक्ष्मण व सीता के वन गमन के बाद राजा दशरथ ने भी प्राण त्याग दिये। गुरुजी वशिष्ठ ने ननिहाल में रह रहे भरत और शत्रुघन को बुलाकर लाने के निर्देश दिया। लौटते वक्त भरत को उदास और धूमिल अयोध्या दिखी तो उनके मन में शंका पैदा हो गई। भगवान राम के वन गमन और पिता मरण की बात सुनकर दोनों भाई बहुत दुखी हुए। भगवान को वापस लाने के लिए चल पड़े। चित्रकूट में भगवान राम, लक्षमण और सीता से भेंट की और वापस चलने को कहा, लेकिन भगवान ने अपने वचन का मान रखने और वापस न जाने की बात कही तो भरत ने उनके खड़ाऊ मांग लिये। जिन्हें सिर पर रखकर अयोध्या लौटे और 14 वर्ष तक वनवासी का जीवन व्यतीत करते हुए भरत ने अयोध्या की राजगद्दी पर भगवान राम की खड़ाऊ रखकर शासन किया। भरत एक आज्ञाकारी भाई, कुशल शासक, अधिकारों के प्रति जागरुक क्षवि वाले चरित्र है। भरत का चरित्र सदैव और सभी के अनुकरणीय है। कार्यक्रम का संचालन संत कवि महेश पाल सिंह उपकारी ने किया। परीक्षित की भूमिका में महेश चन्द्र मिश्रा सपत्नी रहे। व्यवस्था में अनिल त्रिपाठी, रामऔतार दुबे, अरविन्द अग्निहोत्री, सीताराम पाण्डेय, अंकित पाण्डेय, दशरथ सिंह, चन्द्रप्रकाश चतुर्वेदी, अमित बाजपेयी, कार्यकारी अध्यक्ष मनोज अग्निहोत्री प्रमुख रुप से रहे। सैकड़ों की तादात में भक्तों ने कथा का श्रवण किया।

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