विकास की आंधी में न फाग गायन की परम्परा बची और न ही फगुआ की मिठास
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। एक दौर था जब होली के अवसर पर तबले की थाप, मृदंग का घोष और फाग की स्वर लहरियां त्यौहार से पूर्व ही गूंजने लगती थी। इसके साथ ही भौजाइयां फगुआ के रीत रिवाज भी भूल गयी है। होलिकाष्टक लगने के साथ ही टोलिया फाग के गीतों को तबले की थाप और…
