फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। गुरुवार को 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर जोगराज स्ट्रीट में श्रमण संस्कृति के महान संत आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रथम समाधि स्मृति दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में समस्त जैन समाज की महिलाओं ने हिस्सा लिया। यह आयोजन जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। कार्यक्रम में आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन और उनके योगदान को याद किया गया। संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर का छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित जैन तीर्थ स्थान चंद्रगिरी तीर्थ क्षेत्र में महासमाधि में प्रवेश करने से पहले सिर्फ शब्द कहा था सिर झुका और महासमाधि में लीन हो गए थे। आचार्य ज्ञान सागर के शिष्य आचार्य विद्यासागर ने 77 साल की उम्र में चंद्रगिरि तीर्थ में 3 दिन के उपवास के बाद अपना शरीर त्याग दिया था।
30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर में अपने गुरु आचार्य ज्ञान सागर महाराज से मुनि दीक्षा ली थी। आचार्य ज्ञान सागर महाराज ने उनकी कठोर तपस्या को देखते हुए उन्हें अपना आचार्य पद दिया था। 22 साल की उम्र में घर परिवार छोड़ उन्होंने दीक्षा ली थी। दीक्षा के पहले भी उनका नाम विद्याधर था। महिलाओं ने भक्तांबर स्तोत्र के 48 काव्यों को पढक़र 48 दीप प्रज्वललित किए व आचार्य विद्यासागर के भजन गए। नीलम जैन ने आचार्य गुरुवर विद्या सागर को प्रणाम भजन गाकर सबको आचार्य विद्यासागर की याद दिलाई। कार्यक्रम गूंजा जैन, ममता जैन, नीलम जैन, वर्षा जैन, स्वीटी जैन, मंजू जैन, सुचित्रा जैन, अंजू जैन, मिनी जैन, पूनम जैन, आकांक्षा, राजकुमारी आदि जैन समाज की महिलाएं उपस्थित रही।
आचार्य विद्यासागर महाराज का प्रथम समाधि समृति दिवस मनाया
