फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मेला रामनगरिया के वैदिक क्षेत्र चरित्र निर्माण शिविर में बुधवार को वैदिक सत्संग का आयोजन किया गया। कल्पवासियों को गृहस्थ जीवन को सुखी बनाने के उपाय बताए गए। शिविर के संचालक आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि पति और पत्नी इस गृहस्थ रूपी गरथ के दो पहियों के समान होते हैं, यदि इन दोनों में समन्वय न हो तो गृहस्थी की गाड़ी मार्ग से भटक सकती है। इसके लिए दोनों को शास्त्रों का यथावत ज्ञान आवश्यक है, परन्तु आज भौतिकवाद के बढ़ते प्रभाव से गृहस्थ की मर्यादाएं टूट रही हैं। एक सद्गृहस्थ का वास्तविक धर्म श्रेष्ठ सन्तान का निर्माण करना है पर आज का व्यक्ति संतान के स्थान पर उसके लिए भौतिक संसाधनों के निर्माण में लगा रहता है। यही बाद में पारिवारिक दु:खो का कारण बनता है। अपने परिवारों को स्वर्ग बनाने के लिए हमें वेद के विद्वानों के सानिध्य में बैठकर सत्संग लाभ लेना चाहिए तथा अपने पूर्वजों व महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। मर्यादा पुरूषोत्तम राम व योगीराज श्रीकृष्ण आदि महापुरुषों के जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए जो कि एक सद्गृहस्थ के अनुपम उदाहरण हैं।

आचार्य संदीप आर्य ने कहा कि हमे स्वामी दयानंद के बताए मार्ग पर चलकर अपने परिवार को सुखमय बनाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए एक मास तक सभी कल्पवासी नित्य वैदिक क्षेत्र में आकर अपने इस तप को सिद्ध करें, तभी हमारा कल्पवास सार्थक होगा। मध्यान की सभा मे हरदेव आर्य, धनीराम बेधडक़ व उदिता आर्या ने भक्तिमय भजन सुनाकर सभी को मोहित किया। प्रात:काल यज्ञ शैलेश शास्त्री ने संपन्न कराया। कार्यक्रम में हरिओम शास्त्री, उत्कर्ष आर्य, उदयराज, यज्ञ प्रताप, शिशुपाल, प्रशांत आर्य, उपासना कटियार, अमृता आर्या आदि उपस्थित रहे।
