छठ पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है: डॉ0 अनीता रंजन

संतान की लंबी उम्र व सुख समृद्धि के लिए हुई खरना पूजा
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। लोक आस्था का पर्व छठ पूजा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मेजर एसडी सिंह आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल स्थित आवास पर मेडिकल कालेज की डायरेक्टर डा0 अनीता रंजन ने सभी के साथ मिलकर मनाया। दूसरे दिन खरना पूजा की गई। छठ पूजा में खरना का विशेष महत्व है। शाम से लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत का आरंभ हो जाता है। इस दिन रोटी, गुड़ की खीर और फल का भोग लगाया जाता है। खरना वाले दिन भगवान का विशेष प्रसाद व्रत रखने वाली व्रती महिलायें ही तैयार करती हैं और शाम के समय भगवान को अर्पित करने के बाद ही वह उसे ग्रहण करती हैं। खरना से जो उपवास आरंभ होता है वह सप्तमी तिथि के दिन सूर्य देव को अघ्र्य देने के साथ ही समाप्त होता है। बुधवार को मेडिकल कालेज की डायरेक्टर डा0 अनीता रंजन ने छठ पूजा के दूसरे दिन विधि विधान के साथ खरना का पूजन किया। इस कार्य में सभी व्रती महिलाओं ने सहयोग किया। डा0 अनीता रंजन ने मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाई। इसके लिए पीतल के बर्तन का प्रयोग किया। यह खीर बहुत ही शुद्धता और पवित्रता के साथ बनाई जाती है, इसलिए मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है। खीर के अलावा गुड़ की अन्य मिठाई, ठेकुआ और लड्डू आदि भी बनाए जाते हैं। इस महापर्व में बिहार की पूर्णिया लोकसभा के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की माता जी की मौजदूगी से कार्यक्रम और भव्य हो गया। इस अवसर पर मुख्य रुप से डा0 नीतूश्री, ऊषा, प्रियंका, गीता, रेखा, साधना, निर्मला आदि ने भी सहयोग किया।
पौराणिक कथाओं के अनुसार छठ पूजा की शुरुआत तब हुई जब भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। राज्याभिषेक के बाद माता सीता ने अपने परिवार और राज्य की सुख-समृद्धि के लिए सूर्य देव की उपासना की और छठ व्रत का पालन किया। मान्यता है कि उनकी इस आराधना से राज्य में सुख-शांति का संचार हुआ और तभी से यह परंपरा हर वर्ष जारी है। छठ व्रत को अत्यंत कठिन तपस्या माना जाता है। इसमें व्रती चार दिनों तक निराहार रहकर सूरज की पहली और अंतिम किरण को अघ्र्य देते हुए व्रत का पालन करते हैं। छठ पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। यह पर्व जाति, धर्म की सीमाओं से परे है। समाज में आपसी समर्पण और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। लोग अपने दुख सुख को भूलकर एक साथ छठी मैया की उपासना करते हैं। जिससे समाज में एकता और प्रेम का संदेश फैलता है।

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