हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पर्व का शुभारंभ होता है और सप्तमी तिथि को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व का समापन हो जाता है. यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है. छठ पूजा के व्रत रखने का खास महत्व माना जाता है. इस साल आज यानी 5 नवंबर से छठ पर्व की शुरुआत हो रही है. छठ पर्व का पहला दिन नहाय-खाय का होता है. इस दिन घर की अच्छी तरह से सफाई की जाती है ताकि घर का वातावरण शुद्ध और पवित्र हो. इस दिन छठ पूजा का व्रत रखने वाली महिलाएं सिर्फ सादा और सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं. छठ पूजा के भी कुछ खास नियम होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है.
कार्तिक छठ पूजा कैलेंडर
05 नवंबर 2024, मंगलवार- नहाय खाय
06 नवंबर 2024, बुधवार-खरना
07 नवंबर 2024, गुरुवार- संध्या अर्घ्य
08 नवंबर 2024, शुक्रवार- उषा अर्घ्य
छठ पूजा पर नहाय-खाय के दिन करें इन जरूरी नियमों का पालन
- छठ पूजा का पहला दिन, ‘नहाय-खाय’, इस पर्व की शुरुआत का प्रतीक है. इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को कुछ विशेष नियमों का पालन करना होता है.
- इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर पूरे घर की अच्छे से साफ सफाई करनी चाहिए. इसके बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. यदि संभव हो तो स्नान के बाद नए वस्त्र ही पहनें, वरना आप धुले हुए साफ वस्त्र भी पहन सकते हैं.
- अब पूरे विधि-विधान से छठ पूजा का व्रत लेने का संकल्प लें और भगवान सूर्य को जल चढ़ाकर उनकी पूजा अर्चना करें.
- छठ पूजा के दौरान खाने में शुद्धता का खास ख्याल रखा जाता है. इस दिन बनने वाले खाने में भूलकर भी लहसुन-प्याज आदि का प्रयोग न करें. इस दिन भोजन में चने की दाल, कद्दू की सब्जी, और चावल को प्रमुखता दी जाती है.
- इस दिन भोजन बनाने के लिए नए या अच्छी तरह से साफ किए गए बर्तनों का ही उपयोग करते हैं, ताकि भोजन में पवित्रता बनी रहे.
- नहाय-खाय के दिन भोजन पहले सूर्य देव को अर्पित करें, उसी के बाद आप भोजन कर सकते हैं.
- नहाय खाय के दिन इस बात का भी खास ख्याल रखें कि इस दिन बनाया हुआ खाना सबसे पहले, छठ पूजा का व्रत रखने वाली महिलाएं ही खाएं. इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भोजन करें.
- नहाय खाय के दिन जिन लोगों को छठ पूजा का व्रत नहीं रखना है उनको भी सात्विक भोजन ही करना चाहिए.
- छठ पर्व के पहले दिन नहाय खाय के साथ पर्व की शुरुआत होती है। इस विशेष अवसर पर पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन महिलाएं दिन में एक बार भोजन करती हैं।
- दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखती हैं और पानी नहीं पीती हैं।
- तीसरे दिन भी नर्जला व्रत रखा जाता है और सूर्यास्त को अर्घ्य दिया जाता है।
- त्योहार के अंतिम दिन, महिलाएं सुबह सूर्य को उषा अर्घ्य देती हैं और शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करती हैं।
- छठ पूजा के दौरान बर्तन या पूजा सामग्री को किसी दूसरे के हाथ से नहीं छूना चाहिए। ऐसा करने से व्रती का व्रत खंडित हो जाता है।
- महापर्व के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए।
- इसके अलावा पुराने बर्तनों का प्रयोग वर्जित होता है।
