फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में मेला श्रीराम नगरिया के वैदिक क्षेत्र में आयोजित चरित्र निर्माण शिविर में संस्कारों का प्रशिक्षण दिया गया। आये हुए अनेकों विद्वानों ने मनुष्य के जीवन में संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता महंत सोमवारपुरी महाराज ने की। उन्होंने कहा कि बच्चों सभी संस्कार वैदिक रीति से नियमित होने चाहिए। जिससे संतान चरित्रवान व बलवान बने। अन्नप्राशन संस्कार का सामूहिक आयोजन किया गया। जिसकी शुरुआत सोमवारपुरी महाराज व आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने बालक उत्कर्ष आर्य को मधुर पदार्थ खीर खिलाकर की। आचार्य ने बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने संस्कार विधि में लिखा है कि अन्नप्राशन संस्कार सातवां संस्कार है। जब बालक छ: मास का हो जावे तब उसकी आंतों में अन्न पचाने की क्षमता विकसित होने लगती है, तभी विद्वानों को बुलाकर यज्ञ कर का थोड़ा-थोड़ा मिष्ट पदार्थ बालक को रुचि अनुसार खिलाना चाहिए।

इससे पूर्व बालक को अन्न खिलाना वैज्ञानिक रूप से भी निषेध है। ऋषियों ने सभी संस्कारों की जो अवधि निश्चित की है उसी अवधि में सभी संस्कार होने चाहिए। शिवनारायण आर्य व धर्मवीर आर्य ने ईश्वर भक्ति के गीत सुनाएं। उदिता आर्या ने ऋषि दयानंद की महिमा के गीत गाकर उनको गुणानुवाद किया। आचार्य विवेक ने यज्ञ की सम्पूर्ण विधि को सम्पन्न कराया। यजमान हरिओम शास्त्री व रेनू आर्या ने सपरिवार यज्ञ में आहुतियां डाली तथा भण्डारे का आयोजन कर साधु संतों व कल्पवासियों को ऋषि प्रशाद वितरित किया। कार्यक्रम में बाबा जमुना दास, दलवीर शास्त्री, सुरेश चंद्र वर्मा, शिशुपाल आर्य, उदयराज आर्य, रत्नेश द्विवेदी, अर्चना द्विवेदी, उपासना कटियार, ऋतु आर्या, नीलम राजपूत, उदिता आर्या आदि उपस्थित रहे।
