CM योगी का सख्त फैसला: चैत्र नवरात्रि पर धार्मिक स्थलों के पास मांस बिक्री पर रोक

  • धार्मिक स्थलों के 500 मीटर के दायरे में मांस बिक्री पर रहेगा पूरी तरह से प्रतिबंध
  • अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई, यूपी सरकार ने दिए तत्काल बंदी के आदेश
  • राम नवमी पर विशेष सख्ती, 6 अप्रैल को पशु वध और मांस बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित

उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार को नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि के आरंभ होने से पहले अवैध बूचड़खानों को बंद करने और धार्मिक स्थलों के 500 मीटर के दायरे में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है. छह अप्रैल को रामनवमी के अवसर पर विशेष प्रतिबंध लगाए जाएंगे और उस दिन पशु वध और मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.

उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को एक बयान में कहा कि नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और नगर आयुक्तों को तत्काल बूचड़खानों को बंद करने और धार्मिक स्थलों के पास मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया है.

धार्मिक स्थलों के पास मांस बिक्री प्रतिबंधित

योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2014 और 2017 में जारी आदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों के पास अवैध पशु वध और मांस की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. इस निर्णय को प्रभावी बनाने के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियां गठित की गई हैं. इनमें पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पशुपालन विभाग, परिवहन विभाग, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे.

रामनवमी के दिन बंद रहेंगी सभी दुकानें

बयान में कहा गया है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने उप्र नगर निगम अधिनियम 1959 और खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 और 2011 के प्रावधानों के तहत अधिकारियों को उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. सूचना निदेशक शिशिर सिंह ने बाद में एक बयान में कहा कि नवरात्र के दौरान 500 मीटर के दायरे में कोई मांस-मछली की दुकान नहीं होगी. इस दायरे के बाहर भी वे लाइसेंस की शर्तों के तहत काम करेंगे. कोई भी खुले में बिक्री नहीं करेगा. रामनवमी के दिन सभी दुकानें बंद रहेंगी.

राम नवमी पर विशेष निगरानी

6 अप्रैल 2025 को राम नवमी के दिन विशेष प्रतिबंध लागू होगा, इस दिन पशु वध और मांस की बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी। यूपी नगर निगम अधिनियम 1959 और खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 एवं 2011 के प्रावधानों के तहत, योगी सरकार ने अधिकारियों को उल्लंघन करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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