समृद्धि न्यूज। बाराबंकी में श्रीराम स्वरूप विश्वविद्यालय में एलएलबी कोर्स की मान्यता को लेकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज का मामला बढ़ गया है। मुख्यमंत्री के ध्यान देने पर सीओ सिटी निलंबित और कोतवाल हटा दिए गए हैं। मंडलायुक्त और आईजी अयोध्या ने जांच कर बयान दर्ज किए और घटनास्थल का जायजा लिया। उग्र प्रदर्शन में पुलिस ने लाठियां चलाईं जिसमें 22 लोग घायल हुए।
बाराबंकी में छात्रों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर मामला गरमा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त नाराजग़ी जाहिर करते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दे दिए। अब इस पूरे प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी अयोध्या रेंज के आईजी प्रवीण कुमार को सौंपी गई है।
रामस्वरूप यूनिवर्सिटी में एलएलबी कोर्स की मान्यता रद्द हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद छात्रों से एडमिशन लिया गया। जब यह बात सामने आई, तो नाराज़ छात्र और एबीवीपी कार्यकर्ता प्रदर्शन करने लगे। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जो बाद में पुलिस लाठीचार्ज में बदल गई। इस कार्रवाई में करीब 25 से ज्यादा छात्र घायल हो गए। जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
भाजपा के जिलाध्यक्ष अरविंद मौर्य व पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष सिंह आदि के साथ नगर कोतवाली पहुंचे एबीवीपी के प्रदेश मंत्री पुष्पेंद्र बाजपेई ने सीओ सिटी हर्षित चौहान, चौकी इंचार्ज गजेंद्र प्रताप, दारोगा अभिषेक राय और भाड़े पर लाए गए रोहित, अंकित व विपिन सिंह सहित कई लोगों पर हमले का आरोप लगाया। तहरीर में बताया गया कि हमला विश्वविद्यालय के चांसलर पंकज अग्रवाल के इशारे पर किया गया है।
शासन के आदेश पर पूरे प्रकरण की जांच करने आइजी अयोध्या प्रवीण कुमार बाराबंकी पहुंचे। एसपी व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली। आरोपित सीओ हर्षित चौहान सहित कई पुलिसकर्मियों के बयान लिए। इस दौरान वहां मौजूद विश्वविद्यालय के पदाधिकारी भी मौजूद थे, जिनके बयान लिए गए। कई घंटे तक पुलिस लाइन में जांच पड़ताल के बाद घटना स्थल का जायजा लिया गया। वहीं, विश्वविद्यालय की मान्यता की जांच के लिए पहुंचे मंडलायुक्त राजेश कुमार ने मान्यता संबंधी कागजात लिए। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अब इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत हो गई है। सीओ हर्षित चौहान को निलंबित कर दिया गया है, जबकि नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक और गदिया चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर किया गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि छात्रों पर इस तरह की सख्ती किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और मामले की गहराई से जांच कर दोषियों को चिन्हित किया जाएगा। जांच की कमान अब आईजी प्रवीण कुमार के हाथ में है, जो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करेंगे।
छात्रों पर लाठीचार्ज के मामले में योगी के संज्ञान लेने के बाद सीओ सिटी निलंबित, आईजी को सौंपी गई जांच
