सीएचसी शमसाबाद में अवव्यवस्थाओं के साथ फैला भ्रष्टाचार

आशायें प्रसव के बाद तीमारदारों से डाक्टर व नर्स के नाम पर वसूलती है रुपये
रमापुर जसू का एक मामला आया सामने
शमशाबाद, समृद्धि न्यूज। सरकार गरीबों को नि:शुल्क उपचार मुहैया कराने के लिए करोड़ों रुपया खर्च कर रही है, लेकिन स्थानीय तौर पर देखा जाये तो खाऊ-कमाऊ नीति के चलते खुलेआम प्रसुताओं से प्रसव के बाद उनके परिजनों से सुविधा शुक्ल वसूला जा रहा है।
जानकारी के अनुसार ग्राम रमापुर जसू निवासी सत्यभान की पत्नी किरन को सीएचसी शमसाबाद लाया गया। जहां पर किरन ने एक प्यारी सी गुडिय़ा को रात में लगभग १ बजे जन्म दिया। उसके बाद गांव की आशा बिंदावती ने सुबह 500 रुपए डाक्टर नर्स को देने के नाम से मांगे गए। उसके बार-बार मांगने पर सत्यभान की बहन ने आशा बिंदावती को 500 रुपये दे दिए। साथ मे आए परिवार के सदस्य ने बताया कि ऐसे न जाने कितने गरीब मजबूर लाचार परिवार से आते होंगे। उनके साथ ऐसा ही होता होगा। किसी न किसी के नाम से रूपये लेने का सिलसिला जारी है। वहीं एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 500 रुपए लेकर 1 हजार व पन्द्रह सौ रुपए कुछ नहीं यहां इमरजेंसी वार्ड में मरीज से 100 रुपये तक सेवा शुक्ल के नाम पर ले लिये जाते है। ऐसा नहीं इन सब मामलों की कई बार कुछ पीडि़त ने संंबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन कहावत ढांक के तीन पाक जैसी साबित हुई। विभागीय अधिकारी जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते है। जिसके चलते उगाही करने वाले लोगों के हौसले बुलंद है।

ऐसे क्लीनिक है जो नर्सिंग होम की तरह चल रहे हैं

शमशाबाद। क्षेत्र में ऐसे कई क्लीनिक है। जिनमेंं बैड इस तरह पड़े मिलेंगे जैसे किसी सरकारी डाक्टर द्वारा संचालित किया जा रहा हो। छोटा-मोटा अस्पताल इसमें कुछ आशा बहुओं का बड़ा योगदान बताया जा रहा है। सीएचसी शमसाबाद की मेहरबानी कहें या इस समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों का संरक्षण। जिसके चलते प्राइवेट क्लीनिक फल फूल रहे है।
मिली जानकारी के अनुसार डी-फार्मा प्रैक्टिस करने वालों को अभी तक प्रमाण पत्र नहीं दिए गए। लगभग एक वर्ष हो गया है। इसके बाद के भी लोग डी-फार्मा पै्रक्टिस कर चुके है। आखिर इन पर विभाग इतना मेहरबान क्यो है। सीएचसी अधीक्षक सरवर इकबाल पर कई दवाईयों पर धन उगाही करने का आरोप लगता रहा है। डी-फार्मा प्रैक्टिस करने वाले युवक पूरी दबंगई पर उतर आये है और दवा का वितरण बिना पर्चे के करते देखे गये है और बिना परचित के मरीजों को पर्चा बनवाने व कई बहाने बताकर यह लोग परेशान करते है। अब इन सब कमियों की तो जांच जिला स्तर के विभागीय अधिकारी कर कार्यवाही कर करनी चाहिए, लेकिन कहावत चोर-चोर मौसेरे भाई। कौन किसके खिलाफ लिखे। क्योंकि वह जानते है यदि हमने सख्ती की तो कहीं ऐसा न हो कि वह हमारी ही पोल खोल दे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *