न्यायालय कर्मचारियों ने प्रतिज्ञा सभा करके मांगों को लेकर किया आंदोलन

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। जनपद न्यायालय कर्मचारी ने अपनी लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए प्रदेश संघ के आह्वान पर प्रतिज्ञा सभा करके आंदोलन किया। प्रतिज्ञा पत्र पर समस्त कर्मचारियों ने हस्ताक्षर किए एवं इसकी प्रतिलिपि प्रांतीय संघ को भेजी।
कर्मचारियों की माँग हैं कि न्यायिक कर्मियों के अंर्तजनपदीय स्थानांतरण लंबे समय से लंबित हैं, न्यायिक कर्मियों को 2013 में वर्दी पहनने का शासनादेश न्याय अनुभाग से जारी हुआ लेकिन आज तक धनराशि का निर्धारण नहीं हो सका, विभागीय नियमावली में संविदा के पद न होने के बाद भी एफटीसी न्यायालयों में संविदा के पद सृजित किये गये, शेट्टी कमीशन की संस्तुतियों के विपरीत न्यायिक कर्मियों के पद और वेतनमान स्वीकृत किये गये, जनपद न्यायालयों में कर्मचारीगण के अर्जित अवकाश पर जाने पर उनका अवकाश स्वीकृत न कर उसे नियम विरुद्ध तरीके से लंबे समय लंबित रखा जाता है जिससे उस अवधि का अवकाश वेतन भुगतान विलंबित होता है और कर्मचारी को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है। अवकाश की समयबद्ध स्वीकृति एवं विधि विरुद्ध वेतन रोके जाने हेतु न्यायालय से बार-बार अनुरोध किया, लेकिन कार्यवाही लंबित है, जिलों में विभिन्न समितियों, अधिकारियों के समक्ष लंबे समय तक कर्मचारीगण के सेवा संबंधी मामलों के तीव्र निस्तारण हेतु उच्च न्यायालय से अनुरोध किया जा रहा है। उच्च न्यायालय द्वारा निर्देश भी दिये गये, लेकिन जनपद न्यायालय में स्थिति जस की तस है एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का आवासीय कार्यालय पर स्थायी प्रतिबंध किया जाए, आदि सहित कई मांगेें शामिल हैं। दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष ऋषि यादव एवं महासचिव दिनेश गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को जनपद न्यायालय के कर्मचारियों ने कचहरी में स्थित हनुमान मंदिर के समक्ष प्रतिज्ञा सभा का आयोजन किया और ईश्वर से प्रार्थना की कि हमारी समस्याओं का शीघ्र निस्तारण हों। उन्होंने कहा कि यदि हमारी मांगें फिर भी नहीं मानी जाती हैं तो जुलाई 2024 के प्रथम रविवार को कर्मचारीगण जनपद न्यायालय हनुमान मंदिर के ही समक्ष प्रार्थना सभा का आयोजन करेंगे। आंदोलन चरणबद्ध रूप से तेज ही होता जाएगा। उन्होंने बताया कि संघ जनपद न्यायालय कार्मिकों की समस्याओं पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद तथा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उपेक्षापूर्ण व्यवहार से कर्मचारी आहत हैं। मुख्य न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद को प्रेषित पत्रों पर भी अब तक हम प्रतीक्षा में ही हैं।

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