फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने धोखाधड़ी से हथियाई गयी भूमि के मामले में अधिवक्ता सहित चार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के आदेश धानाध्यक्ष अमृतपुर को दिये हैं।
जानकारी के अनुसार पीडि़तजगपाल सिंह पुत्र हीरा सिंह मूल निवासी छोटी बरौन पहाड़ा, तहसील सदर जनपद फर्रुखाबाद का निवासी है और काफी समय से 1432 सेक्टर 5 टा कालोनी पन्त नगर जवाहर नगर, ऊधम सिंह नगर उत्तराखण्ड में नौकरी करता था। वर्तमान में मकान नं0 12 गोल्डन गेट कालोनी जय नगर नं0 1 दिनेशपुर रोड जिला ऊधम सिंह नगर का हाल निवासी है। पीडि़त की ग्राम भुसेरा, परगना खाखटमऊ, तहसील अमृतपुर थाना अमृतपुर स्थित खतौनी 1425 लगायत 1430 फसली के खाता संख्या 151 के गाटा संख्या 242 रकवा 1.8580 हे0 का अपने दूसरे भाई महेन्द्र पाल सिंह के साथ संक्रमणीय भूमिधर है। तदनुसार आराजी निजाई पर काबिज व दखील है। दिनांक 25.07.2022 को सगे भाई वीरेन्द्र सिंह चौहान पुत्र.हीरा सिंह निवासी न्यू आदर्श कालोन लोको मसेनी रोड फतेहगढ़ ने पीडि़त से कहा कि हम तुम्हारे छोटे भाई हैं मुझे भी अपने खेत से दो-दो बीघा जमीन दे दो। मैं व मेरे बच्चे ताउम्र आपका एहसान मानेंगे। पीडि़त नौकरी करता था। पीडि़त ने अपने सहस्वामी छोटे भाई महेन्द्र सिंह से चर्चा करके दोनों लोगों ने चार बीधा खेती अपने छोटे भाई वीरेन्द्र सिंह को देने का फैसला किया और पीडि़त को तहसील अमृतपुर में किसी की जानकारी न होने के कारण दान पत्र अपने किसी जान पहचान वाले से दिनांक 01.08.2022 को करने का आश्वासन दे दिया। पीडि़त दिनांक 01.08.2022 को ऊधम सिंह नगर उत्तराखण्ड से व पीडि़त के छोटे भाई नौवस्ता कानपुर से तहसील अमृतपुर आए और दोनों लोगों ने वीरेन्द्र सिंह चौहान को अपने भूमिधरी गाटा संख्या 242 रकवा 1.8580 हे0 में से 04 बीघा यानी रकवा 0.3240 हे0 का दान पत्र तहरीर कर दिया। जो विक्रय पत्र के द्वितीय भाग पर स्पष्ट अंकन है, परंतु पीडि़त के छोटे भाई वीरेन्द्र सिंह चौहान ने अपने मेलजोली गवाह कुलदीप सिंह राठौर पुत्र विश्वनाथ सिंह निवासी अमृतपुर, परगना व तहसील अमृतपुर व वीरेश सिंह पुत्र ताहर सिंह निवासी अमृतपुर, परगना व तहसील व थाना अमृतपुर जनपद फर्रुखाबाद व दस्तावेज लेखक मुन्ना खान एडवोकेट कचहरी फतेहगढ़ से साज व सांठगांठ करते हुए विक्रय पत्र दान पत्र पेज संख्या-७ में विवरण के स्थान पर छल फरेब व धोखाधड़ी करते हुए सम्पूर्ण शब्द लिख लिया और साथ में लगे नजरी नक्शा में भी सम्पूर्ण लिखवाकर दान पत्र निष्पादित करा लिया। पीडि़त को उक्त सभी लोगों ने दान पत्र का द्वितीय पृष्ठ दिखाया और कहा कि देखो चार बीघा का ही दान पत्र लिखा गया है। पीडि़त ने अपने छोटे भाई पर व उनके साथ के लोगों पर विश्वास करके अंगूठा निशानी व हस्ताक्षर बना दिए। उक्त दान पत्र के आधार पर पीडि़त के छोटे भाई ने दिनांक 09.09.2022 को पूरे गाटा संख्या 242 की आराजी रकवा 1.8580 हे0 का दाखिल खारिज कराकर बैंक ऑफ इंडिया शाखा फतेहगढ़ से दिनांक 11.11.2025-16.12.2022 को 8,19,000/- रुपये का ऋण भी प्राप्त कर लिया। पीडि़त को वर्ष 2023 के मार्च माह में इन्तखाब लेने पर पीडि़त के भाई वीरेन्द्र व उनके साथियों द्वारा की गयी धोखाधडी की जानकारी हुई, तो पीडि़त ने अपने भाई वीरेन्द्र व उनके साथियों से दान पत्र के विवरण भाग में धोखे से सम्पूर्ण लिखने व सम्पूर्ण आराजी का दाखिल खारिज कराकर सम्पूर्ण आराजी पर ऋण लेने की जानबूझकर धोखाधड़ी करने की बात कही, तो सभी ने आश्वासन दिया कि मैं ऋण चुकाकर तुम्हारा दान पत्रं सही करवा दूंगा। पीडि़त अपने भाई की बात पर विश्वास करके चुप बैठ गया। दिनांक 22.06.2025 को वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि तुमने दो साल तक दिए गए आश्वासन पर अभी तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की, तो वीरेन्द्र सिंह ने धमकी देते हुए कहा कि अब मैंने तुम्हारा खेत ले लिया है और उस पर इतना ऋण ले लिया है कि इतने पैसों में तुमको लड़ाकर मार डालूंगा। तुम्हें जो करना हो वह कर लो। खेत वापस नहीं करूंगा। तुम उत्तराखण्ड से यहां आकर मुकदमा करना व उसे लडऩा भूल जाओगे। पीडि़त के साथ उसके भाई द्वारा की गयी धोखाधड़ी की सूचना थाना अमृतपुर को दी। उन्होंने कहा कि आपसी मामला है बड़े साहब से आदेश कराकर लाओ। तब पीडि़त ने दिनांक 24.06.2025 को पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र प्रेषित किया। कोई कार्यवाही न होने पर पीडि़त ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने थानाध्यक्ष अमृतपुर को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये हैं।
न्यायालय ने दिये अधिवक्ता सहित चार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के आदेश
