ढाईघाट गंगा में उतराता मिला गौवंश का शव

मेला प्रशासन की लापरवाही से मेले में गंदगी का साम्राज्य
शमशाबाद, समृद्धि न्यूज।
ढाईघाट मेले में जनपद से ही नहीं, बल्कि अंतर्रजनपदीय इलाकों से आए सैकड़ों कल्पवासी साधु संत डेरा जमाकर कल्पवास ही नहीं कर रहे, बल्कि गंगा स्नान तथा भगवान का गुणगान कर घर परिवार तथा समाज के अलावा देश में अमन चैन की कामनाएं भी कर रहे हैं। इस बार राम नगरिया के मेले में व्यवस्थायें तो की गईं, मगर आधी व्यवस्थायें काल्पवासियों की आंखों में शूल बनकर चुभ रही हंै। यहां मेला प्रशासन तथा अधिकारियों की लापरवाही के चलते गंदगी का साम्राज्य देखा जा रहा है। कहने के लिए भले ही व्यवस्थाएं की गईं हों, लेकिन मेला स्थल तथा गंगा में गंदगी का स्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। परिणामस्वरुप साधू संतों तथा कल्पवासियों में आक्रोश देखा जा रहा है। बताते हैं जिस स्थान पर साधु संत कल्पवास कर रहे वहां से कुछ दूरी पर शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। जब हवाओं का दौर उल्टा होता तो जलते शवों की बदबू कल्पवासियों का हाल बेहाल कर देती है। बताते हंै यहां पूर्व में भी कल्पवासियों ने काल्पवासस्थल से शवों का अन्तिम संस्कार दूर कराए जाने की मांग की थी। अफसोस काल्पवासियों की समस्याओं को अनदेखा किया गया। परिणामस्वरुप लगातार गंदगी का बढ़ता साम्राज्य कल्पवासियों के लिए मुश्किलों का कारण बनता जा रहा है। शनिवार को इसका उदाहरण भी देखने को मिला। जिस पवित्र गंगा की जलधारा में साधू संत स्नान करते हैं उसी में गोवंश का शव पड़ा देखा गया। यह मृत गौवंश कल्पवासियों की मुश्किलों का कारण बना हुआ है। मेला प्रशासन की लापरवाही पर कल्पवासियों ने अफसोस जताते हुए कहा ऐसा लगता जैसे राम तेरी गंगा मैली हो गई पापियों के पाप धोते धोते।

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