चुनावी रंजिश की भेंट चढ़ा गांव जयसिंहपुर का विकास, गांव में नहीं हैं सडक़ें

मार्ग खस्ताहाल होने से नहीं हो रहीं युवाओं की शादियां
नवाबगंज, समृद्धि न्यूज।
योगी सरकार जहां अब गांवों को एक आदर्श गांव बनाने की बात कर रही है और पक्की गलियां, हर घर नल योजना सहित तमाम योजनाएं चला रही है, तो वहीं जनपद फर्रुखाबाद के विकास खंड नवाबगंज की ग्राम पंचायत रमापुर दबीर का मजरा जयसिंहपुर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। ग्रामीण पवन कुमार, जबर सिंह , ध्रुव आदि ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी ग्राम प्रधान रमापुर दबीर की निवासी विनीता देवी है । ग्रामीणों के अनुसार प्रधान घोषित होने के बाद अभी तक उनके गांव में कोई भी विकास कार्य चुनावी रंजिश की वजह से नहीं कराए गए हैं। जिससे अब गांव की प्रत्येक गली तालाब में तब्दील होती जा रही है और ग्रामीणों का गलियों से निकलना दूभर होता जा रहा है। जब इस संबंध में ग्राम पंचायत में तैनात सचिव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जब मैं प्रधान व उनके पति से जयसिंहपुर में विकास कार्य करवाने की बात कहते हूँ, तो प्रधान अनसुनी कर देते हैं। उनका कहना है कि शायद चुनावी रंजिश की वजह से गांव में कोई भी विकास कार्य नहीं कराया जा रहा है।

हालांकि वह प्रयासरत है और जल्द ही गांव की गलियों को दुरुस्त कराएंगे। वहीं जब इस संबंध में प्रधान पति से बात की गई तो उन्होंने कहा कि विकास कार्य के लिए कोई भी पैसा सरकार की तरफ से नहीं आ रहा है, तो वह क्या अपनी जेब से विकास कराएंगे। आपको बता दें कि इस ग्राम पंचायत में अमानक तरीके से प्रधान के परिवार से ही पंचायत सहायक की भी तैनाती हो गई। सेक्रेटरी धर्मेंद्र ने बताया कि पंचायत सहायक कहीं बाहर रहता है, कभी वह आता ही नहीं है। इस कारण भी यह ग्राम पंचायत विकास कार्यों में पीछे है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगभग 2 वर्षों से सफाई कर्मी भी नहीं आ रहा है। जानकारी देते हुए कुछ ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम प्रधान पति ने सफाई कर्मी को भी गांव में आने से रोक दिया है। जिससे अब पूरे गांव की गलियां तालाब मे तब्दील हैं और किसी भी गली से आप पैदल अथवा वाहन से नहीं निकल सकते हैं। रुधे गले से वृृद्ध ग्रामीण जबर सिंह ने बताया कि कई वर्षों से गलियां खस्ताहाल होने से अब उनके गांव में युवाओं की शादियां भी नहीं हो रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांव में जब रिश्ते वाले आते हैं, तो गांव की गलियां तालाब में तब्दील देखकर चुपचाप चले जाते हैं। कोई भी अपनी बेटी का हाथ उनके गांव के युवाओं को देने को तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने एक स्वर में अपने गांव की पक्की गलियां बनवाए जाने की मांग उच्चाधिकारियों से की है।

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