परीक्षित श्राप एवं शिव-पार्वती विवाह की कथा सुन भक्त भावविभोर.

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। गंगा नगर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के तीसरे दिन भागवत कथाव्यास दाताराम अग्निहोत्री ने राजा परीक्षित श्राप की कथा सुनाई। वहीं मानस विद्वान ने शिव और पार्वती के विवाह की कथा सुनाई। दोनों विद्वानों की वाणी सुनकर श्रोता गदगद हो गये व भक्ति की धारा प्रभावित हो उठी। दाताराम अग्निहोत्री ने कहा कि राजा परीक्षित शिकार खेलने गये थे। जंगल में समीक ऋषि तपस्या कर रहे थे। राजा ने पानी मांगा, लेकिन ऋषि समाधि में लीन थे तो राजा ने एक मरा हुआ सर्प उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया। समीक ऋषि के पुत्र श्रंगी ऋषि देख लिया और क्रोधित होकर परीक्षित को श्राप दिया कि एक सप्ताह के अंदर सांप के डसने से राजा की मृत्यु हो जायेगी। राजा दुखी हुए तो समीक ऋषि ने उन्हे श्रीमद् भागवत कथा सुनने की सलाह दी। कहा कि उनका मोक्ष हो जाये। राजा ने श्रीमद भागवत कथा सुनी और एक सप्ताह तक सुनते रहे। तक्षक के काटने से उनकी मृत्यु हुई, लेकिन उन्हें मोक्ष प्राप्त हो गया।
मानस विद्वान डा0 सुरेन्द्र नाथ द्विवेदी ने शिव बारात दृश्य अपने शब्दों से साकार कर दिया। उन्होंने कहा कि शिव का अर्थ कल्याणक होता है। उन्होंने मनुष्य के कल्याण के और तरीके बताये। परीक्षित की भूमिका महेश चन्द्र सपत्नी रहे। संचालन महेश पाल सिंह उपकारी ने किया। व्यवस्था में सहयोग सर्वेश अवस्थी, शुभम दीक्षित, अवेधश शुक्ला, रामसागर दीक्षित, उमेश मिश्रा, हिमांशु शुक्ला, जगदनाथ टंडन, मनोज अग्निहोत्री, अमित, सीताराम पाण्डेय व अन्य भक्तों ने देखी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *