संकिसा में धूमधाम से निकाली गई धम्म यात्रा

संकिसा, समृद्धि न्यूज। भदंत विजय सोम इण्टर कालेज संकिसा के प्रांगण में चल रहे कौमुदी महोत्सव के आयोजक सुनील दत्त शाक्य की अध्यक्षता में परम्परागत धम्म यात्रा निकाली गई। जिसमें पुलिस ने कडी सुरक्षा रखी। पंचशील ध्वज व बैंड बाजों के साथ निकाली गई धम्म यात्रा में बौद्ध अनुयाई जब तक सूरज चांद रहेगा, बौद्ध धर्म का नाम रहेगा आदि नारे लगाते हुए धम्म यात्रा स्तूप पर पंहुची धम्म यात्रा में सम्मिलित बौद्ध उपासकों ने स्तूप के तीन चक्कर लगाए। इसके बाद स्तूप के समीप अगरबत्ती मोमबत्ती प्रज्ज्वलित कर डा धम्म पाल महाथैरो आदि भिक्षुगणों ने पूजा वंदना कराई। जिसके बाद स्तूप परिसर में स्थापित बुद्ध मंदिर में आयोजक सुनील दत्त शाक्य व बौद्ध उपासक एवं भिक्षुगणों ने मोमबत्ती अगर बत्ती जलाकर बुद्ध वंदना की। लड्डू का प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम का समापन कर दिया।

धम्म अलग है और धर्म अलग है: जीएस शाक्य

संकिसा। कौमुदी बुद्ध महोत्सव के मुख्य वक्ता जीएस शाक्य ने अपने वकतव्य में कहा कि मैं इलाहाबाद से चलकर आया हूँ। इलाहाबाद के लोग संगम का मतलब नहीं जानते हैं। दूर के लोग संगम का मतलब जानतें हैं। भगवान बुद्ध के बारे में किसी भी समुदाय के लोग सभी जानतें हैं। सभी को पंचशील का पालन करना चाहिए धम्म अलग है और धर्म अलग है पंचशील सर्वजनीय है। धम्म में ना आत्मा ना परमात्मा होता है। पहले देश खण्ड खण्ड था। अशोक के पूर्वजों ने देश को खण्ड-खण्ड होने से बचाया। अशोक के बीच कलिंग युद्ध हुआ कलिंग युद्ध के 8 वें वर्ष में 1 लाख सैनिक मारे गए 1.5 लाख सैनिक संक्रमित(घायल) हुए शेष को बंधक बना लिया। इस युद्ध में अशोक की जीत हुई, युद्ध में अधिक नरसंहार व खून खराबा देखकर सम्राट अशोक का मन बहुत द्रवित हुआ, इसके बाद वह भगवान बुद्ध की शरण में चले गए। इसके बाद कोई युद्ध नहीं हुआ। सम्राट अशोक ने दूर-दूर तक भगवान बुद्ध का काफी प्रचार प्रसार किया। सम्राट अशोक ने अपने पुत्र व पुत्री को भिक्षु भिक्षुणी बना दिया। मगध,पाटलीपुत्र,तक्षशिला के राजाओं में दो बार विद्रोह हुआ दो बार विद्रोह को रोकने के लिए सम्राट अशोक को भेजा गया।अशोक ने दोनों बार युद्ध रोका। अशोक के किए गए कार्यों की सबसे ज्यादा पुस्तकें लिखी गईं। उतनी किसी की नहीं लिखी गईं। कार्यक्रम की डा. धम्मपाल महाथैरो ने अध्यक्षता की और शिवशरण शाक्य ने संचालन किया।

अपनी मां की सेवा करना बुध्द से सीखो:पूर्व सांसद डा.संघमित्रा

संकिसा। कौमुदी बुद्ध महोत्सव में महिला सम्मेलन की मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डा संघमित्रा मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध को जानने वाला ही असली बुद्धि जीवी है।अपनी मां की सेवा करना बुध्द से सीखो। आप लोग भगवान बुद्ध की बातें तो सुनते हैं पर उनके बताए हुए मार्ग पर नहीं चलते हैं। बौद्ध धर्म का मतलब है सत्य के मार्ग पर चलना। कल युग का मतलब है कि लोग भगवान बुद्ध को तो मानते है, पर उनके शीलों का पालन नहीं करते हैं। महिला सम्मेलन की अध्यक्षता मनजीत कौर ने की और संचालन मंजू श्री रत्ना ने किया। महिला सम्मेलन में तमाम महिलाएं बच्चे आदि मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *