
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। पर्यावरण दिवस मनाना ही नहीं काफी है, बल्कि वर्तमान समय में पर्यावरण को संरक्षित करना भी बहुत जरुरी है। आगामी ०५ जून को पर्यावरण दिवस है। सभी लोग इस दिवस को मनाते हैं। भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि पर्यावरण को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास करें। ज्यादा से ज्यादा पौधे लगायें। घरों में, गमलों में, बालकनी में व बाग बगीचों में पौधे लगाकर उन्हें बच्चों की तरह पालें पोसें, ताकि वह बड़े होकर हमें फल दें और ऑक्सीजन प्रदान कर सकें। पानी का जल स्तर गिर रहा है। ऐसे में जल को भी बचाना है। जरुरत पडऩे पर ही पानी को खर्च करें। पर्यावरण की प्रहरी बनीं प्रकृति प्रेमी व राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की मंडल उपाध्यक्ष व स्कूल रेडीनेस प्रोग्राम की नोडल पुष्पा सिंह ने बताया कि पर्यावरण के संरक्षण के के लिए प्रमुख उपाय अपनाना बहुत जरुरी है। जैव विविधता को संरक्षण प्रदान करके जनता को जागरुक करना। जलीय संसाधनों की सुरक्षा के उपाय करके समाज को जागरुक करना, खनिज संसाधनों की सुरक्ष के उपाय की जागरुकता जरुरी है। वन विनाश की समस्या से निपटन है। भूक्षरण, मरुस्थलीकरण तथा सूखे के बचाव के प्रस्तावों को जनता के समक्ष रखना है। पर्यावरण व्यापक शब्द है। जिसका सामान्य अर्थ प्रकृति द्वारा प्रदान किया गया समस्त भौतिक और सामाजिक वातावरण आता है। इसके अंतर्गत जलवायु, पेड़ पौधे, पर्वत, प्रकृतिक संपदा आदि आते हैं। आज पर्यावरण का ध्यान रखना हर व्यक्ति का कर्तव्य और जिम्मेदारी है। पर्यावरण प्रदूषण के कुछ दूरगामी दुष्प्रभाव हैं। जो अति घातक हैं। जैसे आणविक विस्फोटों में उत्पन्न रेडियोधर्मिता का अनुवाशिक प्रभाव वायुमंडल का तापमान बढऩा, ओजोन पर्त की हानि, भू संरक्षण आदि दुष्प्रभाव हैं। जलवायु तथा परिवेश का दूषित होना एवं वनस्पतियों का विनष्ट होना, मानव का अनेक नये रोगों से अक्रांत होना आदि देखे जा रहे है। इन सबका कारण जल प्रदूषण, वायु और ध्वनि प्रदूषण तीनों ही मनुष्य व अन्य जीवों के स्वास्थ्य को चौपट कर रहे हैं। ऐसे में प्रदूषण की समस्याओं से बचने के लिए स्वच्छ पर्यावरण व स्वस्थ्य वातावरण एवं उपाय की जरुरत है। ऋतु चक्र का परिवर्तन, कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा का बढऩा हिमखंड को पिघला रहा है। सुनामी, बाढ़, सूखा अतिवृष्टि, अनावृष्टि जैसे दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं।
