फर्रुखाबाद: नाम-पहचान सब एक लेकिन, छह-छह जिलों में नौकरी कर रहा अर्पित सिंह, करोड़ों की ली सैलरी

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। फर्रुखाबाद में स्वास्थ्य विभाग में एक फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने सबको चौंका दिया है। अर्पित सिंह नाम के एक नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम सभी रिकॉर्ड में समान पाया गया, लेकिन इसके बावजूद वह 6 अलग-अलग जिलों में एक ही समय पर नियुक्त था। मानव संपदा पोर्टल पर भी सभी के नाम दर्ज हैं। हर माह वेतन भी ले रहे हैं। फिर भी विभागीय अधिकारी आंख बंद किए हैं।
जानकारी के मुताबिक, जनपद के स्वास्थ्य विभाग बड़ा फर्जी बाड़ा सामने आया है। जिसने न सिर्फ व्यवस्था की असली तस्वीर दिखा दी, बल्कि पूरे प्रदेश को सोचने पर मजबूर कर दिया। अर्पित सिंह नाम का युवक पिछले 9 सालों से एक्स-रे टेक्नीशियन के पद पर दर्ज था, वह हर महीने लाखों रुपये का वेतन और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाता रहा, लेकिन मानव संपदा पोर्टल पर जब उनका रजिस्ट्रेशन हुआ, तो राज खुला कि अर्पित सिंह नाम का कोई शख्स है ही नहीं। दरअसल, मई 2016 में स्वास्थ्य विभाग ने एक्सरे टेक्नीशियन की भर्ती की थी। जिसमें कुल 403 पद भरे गए थे, इन सभी की तैनाती अलग-अलग जिलों में की गई। चयनित में एक नाम अर्पित सिंह का भी था, जिसका सीरियल नंबर 80 और रजिस्ट्रेशन नंबर 50900041299 है। उसके पिता पिता का नाम अनिल कुमार सिंह, जन्मतिथि 1989 है। उसे हाथरस में तैनाती मिली, वह मुरसान में तैनात है। स्वास्थ्य विभाग के मानव संपदा पोर्टल पर जब रजिस्ट्रेशन हुए तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। एक ही अर्पित सिंह के नाम, पिता, जन्मतिथि सब कुछ सेम निकले जो अलग-अलग जिलों में तैनात थे। चार का स्थायी पता भी एक ही है। फर्रुखाबाद, बांदा, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर और शामली। यूपी के ये 6 जिले अब इस फर्जीवाड़े की वजह से चर्चा में हैं। वहीं, वेतन की बात करें तो एक अर्पित सिंह हर महीने 69,595 रुपये ले रहा था। एक साल में सिर्फ एक जिले से ही 8,35,140 रुपये की सैलरी ली गई। 9 सालों में केवल एक जिले से 75,16,260 रुपये का भुगतान हो चुका है। अगर 6 जिलों के अर्पित सिंहों के वेतन जोड़ें, तो लगभग 4,5 करोड़ रुपये सिर्फ छ व्यक्तियों ने विभाग से हासिल कर लिए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जांच के लिए गठित की टीम

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने पूरे मामले पर तीन उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी की टीम जांच के लिए बनायी है। सीएमओ डा0 अवीन्द्र कुमार का कहना है कि कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मानव संपदा पोटर्ल पर अर्पित सिंह के नाम दर्ज

(पहला मामला)

नाम-अर्पित सिंह
पिता-अनिल कुमार सिंह
जन्मतिथि-12 जून 1989
नियुक्ति तिथि-31 मई 2016
तैनाती स्थल-सीएचसी मुरसान, हाथरस
मूल पता-सी 22ए प्रतापनगर, शाहगंज, आगरा

(दूसरा मामला)

नाम-अर्पित सिंह
पिता-अनिल कुमार
जन्म तिथि-12 जून 1989
नियुक्ति तिथि- ८ जून 2016
तैनाती स्थल-सीएचसी बिलासपुरए रामपुर
मूल पता-प्रतापनगर, शाहगंज आगरा

(तीसरा मामला)

नाम-अर्पित सिंह
पिता-अनिल कुमार सिंह
जन्म तिथि-12 जून 1989
नियुक्ति तिथि-25 जुलाई 2016
तैनाती स्थल-सीएचसी नरैनी, बांदा
मूल पता-नरैनी, बांदा।

(चौथा मामला)

नाम-अर्पित सिंह
पिता-अनिल कुमार सिंह
जन्म तिथि.-12 जून 1989
नियुक्ति तिथि-12 जुलाई 2016
तैनाती स्थल-सीएचसी बिसौली0 बदायूं
मूल पता-नगला खुमानी, मैनपुरी

(पांचवां मामला)

नाम-अर्पित सिंह
पिता-अनिल कुमार
जन्म तिथि-12 जून 1989
नियुक्ति तिथि-एक अगस्त 2016
तैनाती स्थल-सीएचसी पचपेड़वा, बलरामपुर
मूल पता-सी 22 प्रतापनगर, शाहगंज, आगरा

(छठा मामला)

नाम-अर्पित सिंह
पिता-अनिल कुमार सिंह
जन्म तिथि-12 जून 1989
नियुक्ति तिथि-25 मई 2016
तैनाती स्थल-सीएचसी शमसाबाद, फर्रुखाबाद
मूल पता-सी 22 प्रतापनगर नगर शाहगंज।

वहीं एक ऐसा नाम जो असल में मौजूद ही नहीं है और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर करोड़ों डकार गया। आखिर इस सबके पीछे जिम्मेदार कौन है? वे अधिकारी जिन्होंने दस्तावेजों पर सिर्फ एक ष्ठप्पा लगाने को ही अपना काम समझा, या वो भ्रष्ट मानसिकता, जिसके चलते ऐसे लोग हमेशा बच निकलते हैं।

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