गणेश चतुर्थी आज: घर-घर पधारेंगे मंगलमूर्ति

शुभ मुहूर्त सुबह 11:25 बजे से दोपहर 1:55 बजे तक है।

आज घर-घर पधारेंगे गणपति बप्पा. इस साल गणेश उत्सव की शुरुआत आज यानी 7 सितंबर से हो रही है. हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी के पर्व का विशेष महत्व माना जाता है. यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करते हैं और नए कार्यों की शुरुआत में शुभ फल देते हैं. इस दिन भगवान गणेश की मूर्ति की विधि पूर्वक स्थापना की जाती है और दस दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना की जाती है. यह त्योहार हर साल भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है,  देशभर के पंडालों और घरों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाएगी। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी के पर्व का विशेष महत्व होता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि खास होती है क्योंकि गणेश पुराण के अनुसार भगवान गणपति का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि, चित्रा नक्षत्र और मध्याह्र काल में हुआ था। सनातन धर्म में भगवान गणेश की सबसे पहले पूजा की जाती है और हिंदू देवी-देवताओं में सबसे प्रसिद्ध और ज्यादा पूजे जाने वाले देवता हैं। भगवान गणेश के कई नाम हैं जैसे गणपित, लंबोदर, विनायक, गजानन सुखकर्ता और विन्घहर्ता आदि। शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान गणेश की पूजा और स्थापना के लिए मध्याह्र काल सबसे अच्छा होता है। देशभर में गणेश उत्सव का पर्व 10 दिनों तक चलेगा और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की मूर्ति को जल में विसर्जित करके विदाई दी जाएगी। इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर बहुत ही अच्छा शुभ योग बन रहा है।

गणेश चतुर्थी व्रत में क्या खाना चाहिए?

गणेश चतुर्थी व्रत के दिन मीठी चीजें, जैसे साबूदाने की खीर आदि खाना चाहिए. इस दिन एक समय फलाहार करना चाहिए. इस दिन दही और उबले हुए आलू, खीरा का सेवन भी किया जा सकता है. इस दिन साधारण नमक के बजाए व्रत वाले सेंधा नमक का प्रयोग करें. कुट्टू के पराठे या रोटी भी इस दिन खा सकते हैं. इस दिन व्रत खोलने के लिए सिंघाड़े के आटे से बना हलवा खा सकते हैं.

गणेश चतुर्थी व्रत में नहीं खानी चाहिए ये चीजें

गणेश चतुर्थी व्रत के दिन लहसुन, प्याज, मूली, चुकंदर आदि का सेवन नही करना चाहिए. इस दिन व्रत वाला सेंधा नमक ही इस्तेमाल करें, सादा नमक या काले नमक का प्रयोग इस दिन न करें. इस दिन किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन, मदिरा और हर प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए.

गणेश चतुर्थी पर करें ये काम

  • घर या पूजा स्थल पर गणेश की सुंदर प्रतिमा स्थापित कर, उसे अच्छे से सजाएं फिर उसके बाद पूरे विधि विधान से पूजा करें.
  • गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी को अपने घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में विधि-विधान से बिठाएं, इस दिशा में उनकी पूजा करना शुभ माना जाता है.
  • गणेश भगवान जी को लाल रंग बहुत प्रिय होता है, इसलिए उनकी पूजा में लाल रंग के वस्त्रों का इस्तेमाल करें, जैसे गणपति बप्पा को लाल रंग के वस्त्र के आसन के ऊपर विराजमान करें और उनको लाल रंग के वस्त्र पहनाएं. गणपति जी की पूजा में लाल रंग के पुष्प, फल, और लाल चंदन का प्रयोग जरूर करें.
  • गणेश भगवान की पूजा में दूर्वा घास, फूल, फल, दीपक, अगरबत्ती, चंदन, और सिंदूर और गणपति जी के प्रिय लड्डू और मोदक का भोग जरूर लगाएं.

गणपति की पूजा में दस दिनों तक भगवान गणेश के मंत्र जैसे ॐ गण गणपतये नमः का जाप जरूर करें.

गणपति स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 

आज गणेश चतुर्थी की पूजा और मूर्ति स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से शुरू हो रहा है। शास्त्रों में भगवान गणेश की पूजा और स्थापना के लिए दोपहर का समय सबसे शुभ माना गया है। ऐसे में आज अभिजीत मुहूर्त में गणपति की स्थापना के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त होगा। आज अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा आज गणपति जी की मूर्ति स्थापना तीन शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं।

सुबह- 8 से 9.30 तक
मध्याह्र काल-11.20 से 1.40 तक
दोपहर- 2 से शाम 5.30 तक

गणेश स्थापना पूजा विधि

आज से गौरीनंदन भगवान गणेश 10 दिनों तक घर-घर विराजेंगे। देशभर में बने गणपति जी भव्य पंडालों में अपने भक्तों को दर्शन देंगे। इसके अलावा गणेशजी की प्रतिमा की स्थापना लोग अपने घरों पर भी करते हैं। गणेश पुराण के अनुसार भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मध्याह्र व्यापिनी में करने का विधान बताया गया है। सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर अपने दैनिक क्रियाकर्म करके स्नान करते हुए साफ-सुथरे कपड़े पहनें। फिर घर के जिस स्थान पर बप्पा की मूर्ति को स्थापति करना है वहां पर साफ सफाई करते हुए आसन पर बैठे और गणेश की स्थापना का संकल्प लें। इसके बाद बप्पा की लाई गई मूर्ति के आंखों में बांधी गई लाल रंग की पट्टी को उतारते हुए षोडशोपचार विधि से भगवान गणेश का आवाहन करते हुए उनकी पूजा आरंभ कर दें। इसके बाद हाथ में गंगाजल, फूल और कुश लेते हुए गणेश जी के मंत्रों का जाप करते हुए भगवान गणेश को धूप ,दीप और पुष्प अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक बहुत ही प्रिय होता है ऐसे में उन्हें मोदक, दुर्वा, केले, मोतीचूर के लड्डू चढ़ाएं।

धार्मिक महत्व

मान्यता के अनुसार, गणपति जी को दूर्वा चढ़ाने से सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं और कार्य सिद्ध होते हैं. दूर्वा को पवित्र और शुद्ध माना जाता है. दूर्वा चढ़ाने के पीछे यह मान्यता है कि पूजा का कार्य पवित्रता के साथ किया जा रहा है. साथ ही गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है. मान्यता के अनुसार, दूर्वा भगवान गणेश को खुश करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का आसान उपाय है. दूर्वा यानी जिसे दूब घास भी कहा जाता है, भगवान गणेश के प्रति सम्मान और प्रेम का प्रतीक है. यह अर्पण भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है. इसलिए गणपति की पूजा में दूर्वा को जरूर अर्पित किया जाता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *