परमात्मा साधन साध्य नहीं,कृपा साध्य हैं-पुंडरीक गोस्वामी

रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ उदासीन संगत ऋषि आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा का पांचवा दिन।

समृद्धि न्यूज़ अयोध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ उदासीन संगत ऋषि आश्रम परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन शहर,जिला,गैर जिला और गैर प्रांतों से बड़ी तादाद में श्रद्धालु जन पहुंचे।इन श्रद्धालुजनों को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराते हुए प्रख्यात भागवत कथा वाचक कथा व्यास पुंडरीक गोस्वामी महराज ने कथा रसपान कर रहे श्रद्धालुओं को मंत्र का अर्थ बताया। कथा व्यास पुंडरीक ने बताया कि मंत्र का अर्थ आपके मन में मर्यादा, नैतिकता,मूल्य,सिद्धांत, दया, प्रेम, क्षमाशीलता और परोपकारिता आदि का प्रकट हो जाना है। मंत्र के इस अर्थ का विस्तृत व्याख्यान करने के बाद कथा व्यास पुंडरीक गोस्वामी महाराज ने बताया कि विचार, प्रेम, विश्वास और दया हमें धार्मिक एकता के सूत्र में पिरोकर रखते है।परमेश्वर की लीलायें अनन्त हैं और वे कण कण में समाये हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा साधन साध्य नहीं, कृपा साध्य हैं।अपने मंत्र मे विश्वास और गुरु मे स्वीकृति से ही परमात्मा का प्राकट्य होता है। द्वितीय सत्र की श्रीमद् भागवत कथा के बाद सायं क़ालीन सत्र में भारत के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ राजन मिश्रा एवं स्वरंश मिश्रा द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया गया।इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ रामनगरी की प्रसिद्ध पीठों के संत,महंत,धर्माचार्ययों और सुदूर क्षेत्रों से आए हुए संभ्रांत भक्तजन मौजूद रहे।

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