रामायण में हनुमान जी महाराज की थी अहम भूमिका

पंचम सोपान श्री सुंदरकांड का तात्विक विवेचन को वक्ताओं ने सुना
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। श्री राधा श्याम शक्ति मंदिर लोहाई रोड में पंचम सोपान श्री रामचरितमानस के गहन चिंतन के तात्विक विवेचन में डॉ0 शिव ओम अंबर ने श्री सुंदरकांड में श्री हनुमान जी महाराज की सुंदरकांड में अहम भूमिका का विवेचन किया। अतीत काल में श्रीलंका राक्षसों की नगरी सागर के मध्य थी। रावण ने अपने पराक्रम से इस नगरी पर विजय प्राप्त की और राक्षसी संस्कृति का प्रसार किया। उस समय यहां के पर्वत वन समाज सभी अति सुंदरता एवं समृद्धि थी। हनुमान जी लंका में माता सीता की खोज में गए तो मार्ग में उन्हे बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विचार के शिखर पर चढ़ते हुए दहे के अभिमानी सागर पर छलांग लगाते हुए मैंनाक पर्वत, स्वर्ग का पर्वत, लंका की सुरक्षा में तीन महिलाएं, वीरंगनाए से भेंट होती है। सुरसा का लोकार्पण सिहिंका की ईष्या और लंका की आत्मा विस्मृत चेतना के साथ रामायण में, हनुमान को लंका के द्वार पर लंकिनी का सामना करना पड़ा, जब उन्हें सीता की खोज का काम सौंपा गया था। श्री सुंदरकांड भी सभी सुंदर है, लेकिन अति सुंदर गोस्वामी तुलसीदास जी ने दो स्थानों पर अति सुंदर का उपयोग किया। एक स्थान पर जब देखी मुद्रिका मनोहर राम नाम अति सुंदर, दूसरे स्थान पर सावधान मन करि पुनि शंकर लगै कहन कथा अति सुंदर, अथार्त श्री राम का नाम अति सुंदर लिखा है। श्री सुंदरकांड पाठ समिति के अध्यक्ष बीके सिंह ने कहा कि जो व्यक्ति वर्षों से सुंदरकांड पाठ करता है, सुनता है, करता है, उसके मनोरथ इच्छित फल मिलता है। ऐसा है, वर्षों से अनुभव करते हुए आ रहे हैं। कलयुग में समस्त पापों का निवारण सुंदरकांड पाठ करने से हो जाता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नित्य प्रात: पाठ करना चाहिए। सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान। सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान॥ भावार्थ: श्री रघुनाथजी का गुणगान संपूर्ण सुंदर मंगलों को देने वाला है। जो इसे आदर सहित सुनेंगे, वे बिना किसी जहाज (अन्य साधन) के ही भवसागर को तर जाएँगे। डॉ0 शिव ओम अम्बर का सम्मान श्री सुंदरकांड पाठ समिति चिंतामणि द्वारासमिति के अध्यक्ष बृज किशोर सिंह, घनश्याम बाजपेई, सुरेंद्र, रमेश चंद त्रिपाठी, नारायण सेवा समिति से योगेश मिश्रा ने पुष्पमाला व स्मृति चिन्ह अंगवस्त्र के साथ सम्मानित किया। कार्यक्रम में जितेंद्र अग्रवाल, हर्षित सिगतिया, उत्कर्ष अग्निहोत्री, विजेंद्र श्रीमाली, रविंद्र भदोरिया, रेनू सिगतिया, अलका पाण्डेय, इंदिरा पाण्डेय, गरिमा पाण्डेय सहित सैकड़ो संख्या में भक्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विराम शयन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

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