फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। दरगाह हजरत मखदूम शाहबुद्दीन औलिया लोको शरीफ फतेहगढ़ में कुल की रस्म अदा व फातिहा के बाद उर्स का समापन हुआ।
दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज अजमेर शरीफ की चादर पेश की गई। सज्जादानशीन और नायब सज्जादा नशीन मुहम्मद वसीम ने मुल्क की खुशहाली की दुआ की। दरगाह के सज्जादा नशीन अल्हाज मुहम्मद शरीफ खान उर्फ मुहब्बत शाह की सरपरस्ती में उर्स की सभी रस्में अदा की गई। नमाज फज्र गुस्ल की रस्म अदा की गई और सलातो सलाम व कुरान शरीफ की तिलावत की गई। फातिहा ख्वानी के बाद मुल्क में खुशहाली की दुआ की गई। दरगाह पर सभी धर्मों के जायरीन की भीड़ जुटी। उर्स में जिले से लेकर पंजाब आदि प्रांतों के अकीदतमंद शामिल हुए। मंगलवार को दरगाह हजऱत मखदूम शाहबुद्दीन औलिया के 265वा के चार दिवसीय सालाना उर्स का समापन हुआ। साथ ही महफिले समा का एहतमाम किया गया। कुल फातिहा की तकरीबात हुई। कव्वालों ने बेहतरीन अंदाज में कलाम पेश किए। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपने अपने तरीके से फूल व चादर चढ़ाकर अपनी अकीदत पेश कर खानकाह मे दुआएं मांगी। कव्वाली का भी एहतमाम हुआ।
कमालुद्दीन कव्वाल ने पढ़ा- शाह भी हुसैन हैं, बादशाह भी हुसैन हैं, अल्लाह-अल्लाह, इस्लाम की पनाह भी हुसैन हैं, सर को कटा दिया, पर यज़ीद की बैअत न की।
खानकाह के नायब सज्जादा नशीन शाह मुहम्मद वसीम चिश्ती साबरी मुजद्दिदी ने की और तकरीर कर कहा ख्वाजा ने अपनी खानकाह में इस पैगाम के साथ अपनी खानकाह को आम किया। इस मौके पर सूफी फहीम उर्फ राजा, मौलाना शोएब आतीर मदारी, मिन्हाज उर्फ लवली, फहीम उर्फ राजू, हाजी वसीम जमा, मोहसिन साबरी, कारी मिनशाद, अनवर खान, हाजी शाहनवाज, उमर खान, मुबीन खान साबरी, मुहम्मद हादी खान, अनस खान, अंसार साबरी, प्रवीन अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, शिवम, मोहसिन खान, मुंशी खान, अनवर खान, इसरार साबरी, मुहम्मद हनीफ उर्फ बबलू, उमेश आदि मौजूद रहे।
उर्स के समापन पर मुल्क में खुशहाली की गई दुआ
