फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महापुराण परमात्मा श्रीकृष्ण चन्द्र विग्रह शरीर है, भागवत महापुराण कथा, श्रीकृष्ण चन्द्र में कोई अंतर नहीं है। दोनों ही ज्ञान के प्रकाशक है, लेकिन भगवान से भी महत्वपूर्ण है। भगवान की दिव्य कथा, वह कथा जीव को भगवान का परिचय कराकर जीव के हृदय में भागवत प्रेम एवं भक्ति को उत्पन्न करके भगवान से मिलने का कार्य सम्पन्न करती है। अगर कथा न हो तो भगवान को कौन जानेगा, तथा कौन पहचानेगा। हनुमान जी महाराज कथा के लोभ से ही भगवान श्रीराम के साथ साकेतधाम न जाकर इसी पृथ्वी पर रह गये। श्रीमद् भागवत कथा किसी साम्प्रदाय विशेष के लिए नहीं है, अपितु प्रत्येक जीव को परम सत्य तक पहुंचाने वाली कथा है। लोको रोड पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा प्रवक्ता आचार्य राममूर्ति मिश्र महाराज ने कहा कि सम्प्रदाय भिन्न-भिन्न हो सकते है, जीव मात्र का लक्ष्य है परम सत्य का प्राप्त कर लेना। श्रीमद् भागवत कथा देश काल एवं व्यक्ति की दूरी को मिटाकर जीव के हृदय में परमात्मा को पकट करके परमात्मा से एकाकार कर देती है। आज के समय में यह जीव परमात्मा को भूलकर सुख शांति की खोज में अतिव्यस्त है, संसार से संबंध जोडक़र संस्कारित संबंधों को येन केन प्रकारण संतुष्ट करके अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेता है, लेकिन संसार से संबंध जोडऩे का अर्थ है, अपने को असत्य जड़ एवं दुखों से परिपूर्ण कर देना। क्योंकि संसार असत्य, अज्ञानमय एवं दुखमय है, लेकिन जब यह जीव अपने जीवन में कथा का आश्रय लेकर भगवान का चिंतन करता है तो यह अपने जीवन को सत्य, चैतन्य ज्ञान एवं आनंद से भर देता है। प्रत्येक जीव इस संसार में आनंद, सुख शांति की खोज में व्यस्त है, लेकिन जो वस्तु जहां नहीं है उसे कितना भी खोजो वह मिलने वाली नहीं है। संसार दुखों का सागर है, यदि मनुष्य आनंद एवं शांति चाहता है तो उसे भगवान की शरण में जाना चाहिए। भागवत कथा अमृत प्रदान करने वाली कथा है। ईश्वर का अंश यह जीवन अक्षर अमर अविनाशी है, लेकिन जीव अपने वास्तविक स्वरुप से भटक कर अपने को शरीर अनात्मा एवं मरण धर्मा मानने लगता है और दुखी होता है, लेकिन यह कथा जीव को उसके अजर, अमर, अविनाशी, वास्तविक स्वरुप का परिचय कराकर अपने अमृत्व का बोध कराती है, तथा मृत्यु के भय से मुक्त कर देती है। आचार्य ने बताया कि भगवान की कथा दिव्य कथा गंगा की धारा है। इसमें गोता लगाकर अपने हृदय में ज्ञान और वैराग्य की जाग्रति करके जीवन को धन्य कर सकतेे है। इस अवसर पर गोविंद पाण्डेय, दीक्षा पाण्डेय, शिव कुमार शास्त्री, सरला पाण्डेय, अंजुम दुबे, रामवीर सिंह चौहान, बबिता पाठक, सभासद बिटान देवी, डा0 रजनी सरीन, डा0 वंदना द्विवेदी, गुंजा जैन, सत्यमोहन पाण्डेय, सहित बड़ी संख्या में महिलायें व भक्तगण मौजूद रहे। कथा से पूर्व सुबह कलश यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने बढ़-चढक़र कलश यात्रा में भाग लिया।
यदि मनुष्य आनंद एवं शांति चाहता है तो उसे भगवान की शरण में जाना चाहिए
