इमाम जाफर सादिक दुनिया के बहुत बड़े आलिम व फिलोस्फर: नायब सज्जादा नशीन

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। फतेहगढ़ की मशहूर दरगाह हजऱत मखदूम शाह सय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा के आस्ताने पर कुंडे के दिन उमड़ी भीड़ ने नजरों नियाज़ कर अदा की कुंडो की रस्म और अपने अपने अंदाज़ चादर पोशी और फातिहा का दौर चला। हाफिज़ अरशद साबरी व जामिया चिश्तिया मुजद्दीदिया के तुलबा ने बेहतरीन अंदाज में कुरान पाक की तिलावत की।
नायब सज्जादा नशीन शाह मुहम्मद वसीम उर्फ मुहम्मद मियां ने बताया हिजरी 122 रज्जब की 22 तारीख़ की रात यानी 21 का दिन गुजार कर 22 की रात बा वक़्त नमाज़ तहज्जुद अल्लाह तआला ने सैय्यदना ईमाम जाफऱ सादिक़ अलैहिस्सलाम को मक़ाम, ग़ौसियत, कुब्रा अता फरमाया। सुबह 22 रज्जब को ईमाम जाफर सादिक ने अल्लाह तआला की जानिब से ये अज़ीम नेमत मिलने पर बतौर, शुक्र अदा करने के लिए मिट्टी के बर्तन में नियाज़ करवाई जो दूध और चावल मिलाकर बनाई गई। जिसे हम खीर कहते हैं या उसे कुंडे कहा गया, कुंडे का फातेहा 22 रज्जब उल मुरज्जब को ही करें। 22 रज्जब ना ही आप के विसाल की तारीख़ है और ना ही विलादत की तारीख है, बल्कि इस दिन आपको मक़ाम, ग़ौसियत, कुब्रा अता की गई थी। इसी खुशी में हम ये नियाज़ करते हैं। साथ ही बताया आप अपने जमाने के बहुत बड़े फिलोस्फर भी थे, चूंकि आपका बचपन साइंस व कुरआन पढऩे में गुजरा और आपके शागिर्दों में इमाम, आजम अबू हनीफा जिनसे हनफी मसलक, केमिस्ट्री के फॉदर जाबिन बिन हयान जिनके नाम से केमिस्ट्री में गैबर के नियम वगैरा आज भी पढ़ाए जाते है। आज के दिन खानकाह शरीफ में लोगों का दिन भर फातिहा ख्वानी का चलन रहा। इस मौके पर अंसार साबरी, रफत हुसैन, अज़हर हुसैन, आसिफ साबरी, मनोज कुमार, शिवम् कुमार, राहुल आदि मौजूद रहे।

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