क्या INDIA में कांग्रेस को साइडलाइन करने की है तैयारी?
हरियाणा और महाराष्ट्र में करारी हार के बाद इंडिया गठबंधन के भीतर ही सियासी घमासान शुरू हो गया है. शुरुआत तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के एक बयान से हुई है, जिसमें ममता ने इंडिया गठबंधन के प्रमुख पद पर दावेदारी कर दी है. ममता की इस दावेदारी को जहां समाजवादी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) जैसे दलों का समर्थन मिला है. वहीं कांग्रेस इसका विरोध कर रही है.
1. अडानी मुद्दे पर सपा-टीएमसी का अलग रुख
संसद के भीतर उद्योगपति गौतम अडानी के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और तृणमूल का कांग्रेस से अलग स्टैंड है. दोनों ही पार्टियों ने कांग्रेस की तरफ से लगातार उठाए जा रहे इस मसले को खुद को किनारे कर लिया है. टीएमसी ने तो हाल ही में राहुल गांधी की मीटिंग का बायकॉट तक कर दिया था. पार्टी का कहना है कि किसी एक व्यक्ति के मुद्दे पर संसद को हंगामें की भेट नहीं चढ़ाया जाना चाहिए. समाजवादी पार्टी भी इस मुद्दे से ज्यादा और भी कई मुद्दे को अहम बता चुकी है.शरद पवार की एनसीपी पहले से ही अडानी के मुद्दे पर नरम रवैया अपना चुकी है. दिलचस्प बात है कि कांग्रेस के राहुल गांधी अडानी मुद्दे पर सबसे ज्यादा हमलावर हैं.
2. संभल मुद्दे पर सपा की रडार पर कांग्रेस
उत्तर प्रदेश के संभल में मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर हाल ही में हिंसक घटनाएं हुई थीं. इस घटना में करीब 5 लोगों की मौत हो गई है. सपा इस मसले को लगातार लोकसभा में उठा रही है. सपा का कहना है कि हिंसा सरकार के इशारे पर कराई गई है. यूपी में समाजवादी पार्टी प्रमुख विपक्षी पार्टी है. सपा जहां इस मुद्दे पर मुखर थी. इसी बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संभल जाने का ऐलान कर दिया. कहा जाता है कि राहुल ने इस मुद्दे पर अपने सहयोगी सपा को कन्फिडेंस में नहीं लिया. हालांकि, राहुल ऐलान के बावजूद संभल नहीं जा पाए, लेकिन राहुल के ऐलान से सपा नाराज हो गई. सपा के प्रमुख महासचिव राम गोपाल यादव ने इसे कांग्रेस की नौटंकी करार दे दिया. यादव का कहना था कि कांग्रेस सिर्फ दिखावे के लिए संभल मुद्दे को उठा रही है.
सपा बोली- इंडिया ब्लॉक के नेताओं को मिलकर तय करना होगा
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि वह एक वरिष्ठ नेता हैं, उनके पास बहुत अनुभव है। वह सक्षम हैं। हमारी पार्टी के उनके साथ संबंध अच्छे हैं और हमें उनके नेतृत्व पर भरोसा है। इंडिया ब्लॉक के नेताओं को मिलकर तय करना होगा कि क्या किया जाना चाहिए। अगर ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है, तो हम इसका समर्थन करेंगे।
