आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया में धांधली; विभाग की राज्य मंत्री ने ही उठाए सवाल, निदेशक को भेजा पत्र

बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में हो रहे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर अब विभाग की मंत्री ने ही मोर्चा खोल दिया है। यही नहीं, मंत्री ने इस संबंध में निदेशक आईसीडीएस को पत्र लिखकर भर्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने की शिकायत की है। साथ ही मंत्री ने जिले स्तर पर हो रही भर्ती को रद्द करके इसे प्रदेश स्तर से कराने की मांग भी किया है।

लखनऊ। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग (आईसीडीएस) में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती में चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ संबंधित विभाग की ही मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने मोर्चा खोल दिया है। मंत्री ने निदेशक आईसीडीएस को पत्र लिखकर भर्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत की है। 21 फरवरी को लिखे पत्र में जिले स्तर पर हो रहीं इन भर्तियों को रद्द कर प्रदेश स्तर पर कराने की मांग की है। प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 52 हजार से अधिक पद खाली हैं। इन पर महिलाओं की नियुक्ति होती है। वेतनमान 7500 तक व योग्यता का मानक इंटर है। इन पर पिछले साल से भर्ती प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कई जिलों में अनियमितता के आरोप और हाईकोर्ट में इसकी शिकायत से प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

भर्ती जिम्मेदारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) के पास है। 

इसके लिए गठित कमेटी का अध्यक्ष जिले के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को बनाया गया है, लेकिन डीपीओ की बड़ी भूमिका है। महिला कल्याण एवं बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने पत्र में डीपीओ और कर्मचारियों पर अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है। लिखा है कि वे जिस जिले में दौरे पर जा रही हैं, वहां भर्ती में भ्रष्टाचार की ढेरों शिकायतें मिल रही हैं। आवेदन लेने से लेकर छंटनी तक डीपीओ की देखरेख में हो रही है। गोपनीयता का पालन भी नहीं हो रहा है। डीपीओ दफ्तर के बाबू आवेदक अभ्यर्थियों से सीधे संपर्क कर उनसे दो-दो लाख रुपये मांग रहे हैं।

शुरू से ही विवादों में रही भर्ती प्रक्रिया… निदेशालय की शिकायतों पर चुप्पी

यह भर्ती प्रक्रिया शुरू से ही विवादों में है। कई वार मानक बदले गए। इसके बावजूद भर्ती में मिलीभगत का खेल सामने आ रहा है। जिला स्तर के अधिकारियों पर मानकों के विपरीत पसंद और नापसंद के आधार पर चयन के आरोप लग रहे हैं। ऐसी शिकायतें शासन और आईसीडीएस निदेशालय भी पहुंच रही हैं, लेकिन निदेशालय स्तर पर शिकायतों को दवाया जा रहा है।कई जिलों के डीएम तक ने शासन को भर्ती के मानको में भ्रामक बिंदुओं को शामिल करने को लेकर पत्र लिखा था, लेकिन शासन और निदेशालय ने ऐसी सारी शिकायतों को दाखिल दफ्तर कर रखा है। अब देखना है कि मंत्री द्वारा उठाई गई आपत्ति पर कार्रवाई होती है या नहीं। इससे पहले सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय ने रायबरेली में हुई भर्ती में गड़बड़ी का हवाला देते हुए कई जिलों में अनियमितता का मामला विधानसभा में उठाया था। इसपर भी विभाग मौन है।

आय प्रमाण पत्र बनवाने तक में खेल

सूत्रों का कहना है कि कई जिलों की भर्तियों में तो आय प्रमाण पत्र बनवाने तक में खेल की शिकायतें पहुंच रही हैं। दरअसल भर्ती में पात्रता के लिए आय की भी सीमा तय की गई है। लेकिन क्षेत्र के तमाम रसूखदार, अधिकारी, नेता, स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने-अपने लोगों की भर्ती कराने के लिए तहसील कर्मियों से मिलकर आय प्रमाण पत्र बनवाने भी गड़बड़ी कर रहे हैं।ऐसी तमाम शिकायतों पर न तो शासन कुछ बोलने को तैयार है और न ही निदेशालय।

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