शमशाबाद, समृद्धि न्यूज। शमशाबाद क्षेत्र की गंगा नदी के किनारे बसे लगभग आधा दर्जन से अधिक गांव आजकल बाढ़ की चपेट में चल रहे हैं। बाढ़ के चलते गांव में जलभराव का आलम देखा जा रहा है। घर-घर में जलभराव के हालातों को देख तथा भविष्य के खतरों को देखते हुए ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं। पिछले कई दिनों से क्षेत्र में बाढ़ का तांडव जारी है। लोगों की सारी व्यवस्थाएं चौपट हो गईं। यहां तक कि रोजी रोटी का जरिया मेहनत मजदूरी भी ठप्प हो गई। विकराल हुये बाढ़ के हालातों ने आम आदमी को झकझोर कर रख दिया। घरो में पानी भरा हुआ है। ऐसे हालातों में जहां एक ओर खुद को बचाना मुश्किल हो गया है। वहीं दूसरी ओर लोगों को अपने-अपने बेजुबान जानवरों को भी बचाना मुश्किल हो गया है। चारे की व्यवस्थायें ध्वस्त हो गई। गांव से लेकर खेत खलिहान सब कुछ पानी में समाए हुए हैं। किसानों के खेतों में जलभराव देखा जा रहा है। कृषि कार्य करने वाले किसानों को हजारों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मक्का, मूंगफली जैसी फसलें जलभराव का शिकार होकर बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। इसके अलावा कुछ और भी फंसलें हैं जो जल प्रलय की भेंट चढ़ गई है। विकास खंड शमसाबाद क्षेत्र के ग्राम झौआ का मजरा, कठेरियन नगला पट्टियां जो गंगा नदी से कोई 3 किलोमीटर दूरी पर हैं लेकिन बाढ़ का पानी गांल से लेकर खेत खलिहानों तक देखा जा रहा है। सबसे बड़ी बात है घरों में पानी भर गया है। गांव में ऐसे कई लोग हैं जो इस वक्त फांके करने को मजबूर हैं, क्योंकि बाढ़ ने घर गृहस्थी की सारी व्यवस्थाएं चौपट कर दीं। मजबूरन लोग भविष्य के खतरे को देखते हुए पलायन करने को मजबूर हैं। पलायन करने वाले लोगों ने गांव से दूर सड़क किनारे डेरा जमा लिया, लेकिन अब संक्रामक बीमारियां बेहाल कर रही। बताते हैं यही की रहने वाली एक वृद्ध महिला जो कुछ समय से बीमार थी। हालत खराब होने के कारण चारपाई के सहारे जान की बाजी लगाकर सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाद में ट्रैक्टर ट्राली के जरिए चिकित्सालय ले जाया गया। प्रशासनिक व्यवस्थाओं के मरहूम ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा जलभराव के चलते पिछले एक सप्ताह से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने ग्राम प्रधान देवेंद्र सिंह से समस्याओं का समाधान कराए जाने की मांग की। मगर ग्राम प्रधान ने हाथ खड़े कर दिए। ग्रामीणों।के अनुसार उनके द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों से भी शिकायत की गई। मगर दुख है अभी तक किसी भी अधिकारी कर्मचारी ने गांव आना मुनासिब नहीं समझा। गुरुवार को पानी में घुसकर गांव पहुंचे हमारे संवाददाता ने जब यहां लोगों से जानकारी की तो बाढ़ पीडि़त लोगों में सुधीर कुमार, सर्वेश कुमार, वीरपाल, राजीव, रामसेवक, अनोखे लाल, रघुवीर सिंह, शीशराम, श्रीपाल, राजेंद्र सहित दर्जनों लोगों ने बताया गांव की कुल आबादी लगभग 300 के आसपास है। बाढ़ पीडि़त अधिकांश लोगों के घरों की व्यवस्थाएं चरमरा गई। खाने पीने के लिए अधिकारियों की मेहरबानियों का इंतजार कर रहे हैं तथा कुछ जनप्रतिनिधियों की बाट जोह रहे हैं।


