योगी शासन में चरमराई लोहिया की व्यवस्था, चार दिन से महिला को नहीं मिला उपचार

जीने की सीढिय़ों पर लेटी, अस्पताल के चक्कर काट रहा पति
सरकार आठ साल की उपलब्धियों का जारी कर रही रिपोर्ट कार्ड
सीएमएस की भ्रष्टाचार नीति के चलते लोहिया का हाल बेहाल
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज।
लोहिया अस्पताल की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। आये दिन खबरें छपने के बाद भी सीएमएस कोई सुधार नहीं कर रहे हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण है कि बीते चार दिनों से महिला सीढिय़ों पर पड़ी है, लेकिन उसे भर्ती नहीं किया जा रहा है। जिससे उसका पति व परिजन काफी परेशान हैं। पीडि़त के पास इतना पैसा नहीं है कि वह प्राइवेट में उपचार करा सके।
जानकारी के अनुसार हैवतपुर गढिय़ा कॉलोनी निवासी अमन अपनी 25 वर्षीय पत्नी सोनल को इलाज के लिए पिछले चार दिनों से अस्पताल के चक्कर काट रहा हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गंभीर हालत में सोनल कभी सीढिय़ों पर पड़ी नजर आती हैं, तो कभी अस्पताल के फर्श पर लेटी दिखती हैं। डॉक्टरों की लापरवाही के कारण महिला का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पा रहा है। जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
पति अमन का कहना है कि डॉक्टरों से मिलने की कोशिश करने पर उन्हें अलग-अलग बहाने सुनने को मिलते हैं। कोई कहता है कि डॉक्टर दौरे पर गए हैं, तो कोई कहता है कि वे मीटिंग में व्यस्त हैं। मरीजों के लिए अस्पताल में सर्जन डॉक्टरों का मिलना नामुमकिन सा हो गया है। पीडि़त पति ने बताया कि सोनल के पेट में पथरी की समस्या है और उसे तुरंत ऑपरेशन की जरूरत है, लेकिन अस्पताल में कोई सर्जन उपलब्ध नहीं है। जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। सोनल को अस्पताल में भर्ती करने के बजाय धक्का देकर टरकाया जा रहा है। अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की इस दुर्दशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सीएमएस अशोक प्रियदर्शी की लापरवाही के चलते मरीजों को डॉक्टरों से मिलने के लिए पूरे-पूरे दिन इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इलाज नहीं मिल पाता। अस्पताल में सोनल अकेली ऐसी मरीज नहीं हैं। जिन्हें सही इलाज नहीं मिल रहा। कई अन्य मरीज भी डॉक्टरों के इंतजार में घंटों बैठे रहते हैं। प्रशासन की उदासीनता के चलते जरूरतमंद मरीज फर्श पर पड़े रहने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की जांच कर लापरवाह डॉक्टरों पर कार्रवाई करने की मांग की है। अगर अस्पताल में यही स्थिति बनी रही, तो गरीब मरीजों को इलाज मिलना और भी मुश्किल हो जाएगा।

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