फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मेला रामनगरिया के वैदिक क्षेत्र चरित्र निर्माण शिविर में आज वेद रक्षा सम्मेलन का आयोजन हुआ। विद्वानों ने वेदों की महत्ता पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये। शिविर के संचालक आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि वेद श्रष्टि का संविधान है क्यों कि ईश्वर ने संसार की रचना करने के साथ ही मनुष्य के कल्याण के लिए वेद रूपी ज्ञान चार ऋषियों के अंत:करण में प्रकट किया। कालांतर ने यही ज्ञान गुरु परम्परा से होता हुआ लिपिबद्ध रूप से हमारे सामने प्रकट हुआ। जब तक वेदों का पढऩा इस देश में जारी रहा, तब तक ये देश विश्वगुरू के रुप में संसार मे प्रतिष्ठित रहा। महाभारत काल के बाद वैदिक मर्यादाएं टूटने लगीं और मुगलकाल आते-आते वेदों का पठन-पठान छूट गया।

जिसके परिणाम स्वरूप अनेको मतमतान्तरों का जन्म हुआ और समाज का सांस्कृतिक तथा वैचारिक पतन प्रारम्भ हुआ। स्वामी महेन्द्रानंद ने कहा कि वेदों के मार्ग पर चलकर ही पुन: भारत को विश्वगुरु बनाया जा सकता है। धर्मवीर शास्त्री ने वेद की महत्ता के गीत सुनाकर लोगों को वेद से जोड़ा। उनके गीत जिस दिन वेद के मंत्रों से धरती को सजाया जाएगा उस दिन मेरे गीतों का त्यौहार मनाया जाएगा। प्रदीप शास्त्री व उदिता आर्या ने वेदों की महिमा के गीत सुनाए। शिविर के संयोजक डॉ0 शिवराम सिंह आर्य ने बताया कि 11 फरवरी को वैदिक क्षेत्र से विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। जिसमें विभिन्न अखाड़ों के साधु सन्यासी व कई जनपदों के आर्यजन भाग लेंगे। कार्यक्रम में स्वामी संजीवनंद, स्वामी देवानंद, राजकुमार आर्य, सत्येंद्र शास्त्री, हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, प्रवल आर्य, हर्ष आर्य, उत्कर्ष आर्य, प्रशांत आर्य, रेनू आर्या, रत्नेश द्विवेदी, अमृता आर्या आदि उपस्थित रहे।
