हाथरस सत्संग कांड में पहली FIR, लेकिन बाबा का नाम नहीं

हाथरस हादसे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज  इलाके का दौरा कर सकते हैं। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐसा संकेत दिया है।

हाथरस हादसा: किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए संपर्क नंबर

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हाथरस भगदड़ स्थल की जांच-पड़ताल के लिए फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई है। फोरेंसिक टीम ने डॉग स्क्वॉड के साथ जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सीएम ने कहा है कि मामले की तह तक जांच की जाएगी, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

भक्ति कहें या अंधभक्ति। पांव छूने की होड़ ने मौत का प्रहसन रच डाला। एक तरफ बाबा के पांव छू लेने की होड़ थी, दूसरी तरफ सेवादारों की बंदिशें। लोग उनकी बंदिशें तोड़कर भागे और मौत की सरहद में जा धंसे। कोई धक्के से गिरा तो कोई फिसलकर। किसी का सीना कुचला तो किसी का सिर। उमस पहले से सांसों पर भारी थी। अस्पतालों में भर्ती लोगों से जब बात की गई तो उनका कहना था कि भीड़ के बीच सांस लेना तक मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान भगदड़ मच गई।

दोपहर को दो बजे सत्संग समाप्त होने के बाद भीड़ हाईवे किनारे खड़ी बसों की तरफ बढ़ रही थी। इस भीड़ में राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश की महिलाएं, पुरुष और बच्चे थे। जब भीड़ हाईवे की तरफ पहुंची तो सत्संग स्थल से हाईवे को जाने वाला रास्ता बंद होने लगा। इसी दौरान आयोजकों ने माइक ने घोषणा शुरू की। सेवादारों को निर्देश दिए जा रहे थे कि वह भीड़ को रोककर बाबा के काफिले को गुजारने का रास्ता बनाएं। बस फिर क्या था 250 सेवादारों का जत्था भीड़ को रोककर खड़ा हो गया। भीड़ में सबसे आगे महिलाएं बताई जा रही हैं

पुलिस ने मुख्य सेवादार देव प्रकाश और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, बाबा का नाम नहीं

उत्तर प्रदेश के हाथरस के फुलवाई गांव में मंगलवार को सत्संग में मची भगदड़ में 122 श्रद्धालुओं से अधिक की मौत हो गयी।. वहीं  अधिक लोग घायल हैं. इस मामले में पुलिस ने मुख्य सेवादार देव प्रकाश और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. लेकिन पुलिस की इस एफआईआर पर भी सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि इसमें सत्संग करने वाले भोले बाबा का नाम शामिल नहीं है.अधिकारियों के मुताबिक, सत्संग के आयोजन के लिए अनुमति ली गई थी, लेकिन पुलिस से 80000 श्रद्धालुओं के शामिल होने की ही अनुमति मांगी गई थी. इसी के हिसाब से कार्यक्रम स्थल पर प्रशासन ने इंतजाम किए थे. मंगलवार को सत्संग में ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु आए. आयोजकों ने पुलिस से श्रद्धालुओं की संख्या को छिपाया. लेकिन इस पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सुबह से आयोजन हो रहा था और पुलिस ढाई लाख लोगों की भीड़ कैसे नहीं देख पाई.

इस हादसे ने पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था की भी पोल खोल कर रख दी. भगदड़ के दौरान पुलिसकर्मी लाचार दिखाई दिए. वहीं जब शव हाथरस के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने लगे तो वहां पर कोई व्यवस्था ही नहीं थी. एक श्रद्धालु ने बताया कि जब वह ट्रॉमा सेंटर में गया तो एक जूनियर डॉक्टर और एक ही फार्मासिस्ट मौजूद थे. सीएमओ भी मौजूद नहीं थे. वह डेढ़ घंटे बाद अस्पताल पहुंचे. शुरुआत में डॉक्टर स्टेचर पर ही घायलों का प्राथमिक उपचार कर रहे थे. अगर स्थिति गंभीर थी तो उसे रेफर कर दिया गया.यह हादसा दो बजे के करीब हुआ. जब सत्संग के समापन के बाद भोले बाबा वहां से निकलने लगे तो श्रद्धालु उनके चरणों की धूल को छूने के लिए आगे बढ़े. फिर धक्का-मुक्की होने लगी. लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे. भगदड़ मच गई. कार्यक्रम स्थल के पास में दलदली खेत था, यहां कई लोग यहां फंसे. कीचड़ में कई लोग गिरे. कई महिलाएं बेहोश हो गईं. पुलिस के मुताबिक, कार्यक्रम स्थल पर जिस समय भगदड़ हो रही थी, सेवादार और आयोजक चुपचाप देखते रहे. किसी ने कोई सहयोग नहीं किया. फिर एक-एक कर खिसक गए. पुलिस ने ही घायलों को अस्पताल पहुंचाया. इस हादसे पर पीएम मोदी और सीएम योगी ने दुख जताया है. सीएम योगी ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं. इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम का गठन किया गया है. इस टीम में डीआइजी रैंक के अधिकारी शामिल हैं.

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