दोष धातु मल मूलंहि शरीरम विषय पर आयुर्वेदाचार्यों ने दिये व्याख्यान

* मेजर एसडी सिंह पीजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में नौवां राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न
*डॉ0 महेंद्र ने लाइव डिमांस्ट्रेशन के जरिये मूत्र परीक्षा ले समझायी रोगों की साध्यता व असाध्यता
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज।
मेजर एस.डी. सिंह पी.जी. आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में क्रिया शारीर विभाग द्वारा आयोजित नौवीं राष्ट्रीय संगोष्ठी ”दोष धातु मल मूलंहि शरीरम् विषय पर बोलते हुए स्टेट आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज लखनऊ के प्रोफेसर डॉ0 रवीन्द्र कुमार यादव ने कहा कि दोष शरीर का मूल है।
महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ0 यादव ने सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई जो कि आयुर्वेद में वर्णित है, उसका वैज्ञानिक महत्व बताते हुए आधुनिक मतानुसार जीवन उत्पत्ति की तुलना की। डॉ0 रवीन्द्र ने लोक पुरुष साम्य का आधुनिक मत से भावी चिकित्सकों को व्याख्यान दिया। डॉ0 यादव ने दोष का वैज्ञानिक आधार बताते हुए उसका महत्व समझाया और दोष का शरीर में क्या योगदान है उसके बारे में विस्तार से छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर राजस्थान सेआये डॉ0 महेन्द्र प्रसाद ने मूत्र परीक्षा से रोगों की साध्यता और असाध्यता पर विस्तार से जानकारी दी और मूत्र की चिकित्सा में उपयोगिता के बारे में बताया। डा0 प्रसाद ने मूत्र की तैल बिन्दु परीक्षा का लाइव क्रियात्मक प्रदर्शन करके दिखाया। उन्होंने लाइव डिमान्स्ट्रेशन के जरिए मूत्र पर तैल बिन्दु की दिशा स्थित, आकार एवं गति देख कर रोगों की साध्यता और असाध्यता के बारे में उपयोगी जानकारी दी। डॉ0 प्रसाद ने मधुमेह, पक्षाघात आदि विभिन्न रोगों में मूत्र परीक्षा की उपयोगिता के बारे में छात्र-छात्राओं को बताया। इससे पूर्व भगवान धन्वन्तरि के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं माल्यार्पण किया तथा धन्वन्तरि वन्दना के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। प्राचार्य डॉ0 सुनील कुमार गुप्ता, पीजी डीन डॉ0 देवाशीष बिस्वाल तथा क्रिया शारीर विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ0 अंजना दीक्षित ने दोनों मुख्य वक्ताओं का शॉल ओढ़ाकर तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं ने पेपर प्रजेन्टेशन के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संहिता सि़द्धान्त के लेक्चरर डॉ0 राजकुमार विश्वकर्मा ने मुख्य अतिथियों का अभिनन्दन करते हुए विद्यार्थियों ने उनका परिचय कराया। प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने सेमिनार के विषय दोष धात मल मूलंहि शरीरम् पर विस्तार से विद्यार्थियों को जानकारी दी तथा सेमिनार के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना के रीडर डॉ0 शिवओम दीक्षित तथा स्वस्थवृत्त एवं योगा के लेक्चरर डॉ0 अरुण कुमार पाण्डेय ने किया। अंत में क्रिया शारीर विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ0 अंजना दीक्षित ने सेमिनार के सफल आयोजन के लिए दोनों अतिथियों, प्रबन्ध तंत्र तथा प्राचार्य सहित अन्य शिक्षकगण तथा गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रमें उप प्राचार्य डॉ0 जॉली सक्सेना, प्रो0 डॉ0 वीरेन्द्र सिंह यादव, प्रो0 डॉ0 शीलू गुप्ता, प्रो0 डॉ0 विजय मोहन गुप्ता, प्रो0 डॉ0 रीता सिंह, प्रो0 डॉ0 निरंजन एस., डॉ0 इतिश्री दास, डॉ0 संकल्प सिंह, डॉ0 पंकज शुक्ला, डॉ0 विकास बाबू, डॉ0 रविशंकर मौर्य, डॉ0 अंकुर सक्सेना, डॉ0 अविधा देवराज सिंह, डॉ0 इरिना एस. चन्द्रन, डॉ0 भारती पांचाल, डॉ0 लक्ष्मी सिंह, डॉ0 अमृता विजयन आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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