महिला चिकित्सालय में आयोजित किया गया विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर

समृद्धि न्यूज़ अयोध्या। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देशन तथा जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रणंजय कुमार वर्मा के निर्देशानुसार अपर जनपद न्यायाधीश/प्राधिकरण सचिव अनिल कुमार वर्मा के निर्देश पर गुरुवार को जिला चिकित्सालय (महिला) में विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।यह शिविर महिलाओं एव बालिकाओं की सुरक्षा,सम्मान एवं स्वावलम्बन हेतु ‘‘मिशन शक्ति’’ कार्यक्रम के अन्तर्गत लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम,महिलाओं की सुरक्षा एवं सम्मान तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम,1971 के विषय पर आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन पी.एल.वी. प्रियंका त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस शिविर में उपस्थित अभिभावकों,अध्यापकों तथा बालिकाओं को लैंगिक समानता, लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम तथा बाल विवाह के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी।शिविर में प्राधिकरण सचिव श्री वर्मा ने बाल विवाह विषय पर जानकारी देते हुए अपने उद्बोधन में बताया कि बाल विवाह पर रोक संबंधी कानून सर्वप्रथम सन् 1929 में पारित किया गया था।बाद में सन् 1949,1978 तथा 2006 में इसमें संशोधन किए गए।इस समय विवाह की न्यूनतम आयु बालिकाओं के लिए 18 वर्ष तथा बालकों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गयी है।उन्होंने बताया कि भारत में बाल विवाह चिंता का विषय है।बाल विवाह किसी बच्चे को अच्छे स्वास्थ्य,पोषण और शिक्षा के अधिकार से वंचित करता है।श्री वर्मा ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि कम उम्र में विवाह के कारण लड़कियों को हिंसा,दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का अधिक सामना करना पड़ता है।कम उम्र में विवाह का लड़के और लड़कियों दोनों पर शारीरिक,बौद्धिक,मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ता है,शिक्षा के अवसर कम हो जाते हैं और व्यक्तित्व का विकास सही ढंग से नहीं हो पाता है।उन्होंने बताया कि हाल ही के वर्षाें में बाल विवाह के इस प्रथा को रोकने की दिशा में काम किया गया है।इसके अंतर्गत उन लोगों के खिलाफ कठोर उपाय किये गये हैं जो बाल विवाह की इजाजत देते हैं और उसे बढ़ावा देते है।उन्होंने बताया कि बाल विवाह अधिनियम,1971 के अंतर्गत 21 वर्ष से कम आयु के पुरूष और 18 वष से कम आयु की महिला के विवाह को बाल विवाह के रूप में परिभाषित किया गया है।इसी क्रम में पीएलवी/अधिकार मित्र डाॅ प्रियंका त्रिपाठी ने बताया गया कि महिलाओं के गर्भ में पल रहे भू्रण के लिंग की जांच कराना कानूनी तौर पर अपराध है तथा लिंग की जांच करते पाये जाने पर परिजनों व चिकित्सक को सजा दिये जाने का प्राविधान है। साथ ही यह भी बताया कि बालिकाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और लैंगिक शोषण से बचाव हेतु वे कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पर प्रार्थना पत्र दे सकती हैं तथा नालसा द्वारा संचालित टो फ्री हेल्पलाइन नं0-15100 पर काॅल कर उचित विधिक परामर्श प्राप्त कर सकती हैं।साथ ही साथ केन्द्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं के अधिकार,सम्मान तथा सुरक्षा हेतु कन्या सुमंगला योजना,जननी सुरक्षा योजना, यू.पी. मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना,बैंक सखी योजना, उज्जवला योजना आदि विभिन्न योजनाओं के विषय में भी जानकारी दी गयी।इसी क्रम में विधिक सेवा दिवस के अन्तर्गत भी जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। उक्त जागरूकता शिविर का आयोजन तहसील,ब्लाॅक,स्कूल, काॅलेज तथा डाॅ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या पर किया गया। जागरूकता शिविर में डाॅ वन्दना गुप्ता असिस्टेंट प्रोफेसर(विधि संकाय),डाॅ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय द्वारा घुमंतू लोगों को उनके अधिकारों के विषय में जानकारी प्रदान करते हुए उन्हें विधिक रूप से जागरूक किया गया।

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