नारी शरणालय में आयोजित किया गया विधिक साक्षरता शिविर,दी गई जानकारियां।

समृद्धि न्यूज़ अंबेडकर नगर।उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रेषित प्लान आफ एक्शन के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष राम सुलीन सिंह के निर्देशानुसार शुक्रवार को नारी शरणालय में सितंबर माह में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अंतर्गत ‘कुपोषण की समस्या एवं बचाव’ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में अपर जिला जज व प्राधिकरण सचिव कमलेश कुमार मौर्य,प्रभारी अधीक्षिका भारती शुक्ला,नारी शरणालय के कर्मचारियों तथा निवासरत संवासनियां उपस्थिति रही।शिविर को संबोधित करते हुए सचिव श्री मौर्य ने बताया कि शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है।कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं।इसलिए कहा जाता है कि स्त्रियों और बच्चों में कई ऐसे रोग पाए जाते हैं जिनके कारण संतुलित भोजन का अभाव होना है।उन्होंने बताया कि प्राय: यह देखा गया है कि यदि शरीर की वृद्धि रुकना,उत्साह का अभाव, वजन का लगातार काम होना, पाचन क्रिया का खराब होना या शरीर में अन्य प्रकार की समस्याएं दिखने लगे तो यह भी कुपोषण के संकेत हैं।उन्होंने कुपोषण की रोकथाम एवं उपचार के लिए अस्पताल में साप्ताहिक टीकाकरण,शीघ्र स्तनपान कराने, छह माह तक मां का दूध पिलाने तथा छह माह बाद पूरक आहार दिए जाने आदि के संबंध में विस्तार से बताते हुए कहा कि कुपोषण एक अभिशाप है और इसे समाप्त करने के लिए हम सबको मिलकर कदम उठाना पड़ेगा नहीं तो बिना स्वस्थ समाज के स्वस्थ राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती।उन्होंने बताया कि माता और बच्चों का स्वास्थ्य ठीक रहा तो यही बच्चा आगे चलकर राष्ट्र का नाम रोशन करेगा।गांव के लोगों में भ्रांतियां है कि बच्चों के पैदा होने पर पीला गाढ़ा दूध नहीं पिलाना चाहिए,यह दूध बच्चों को नुकसान पहुंचता है।इस प्रकार की अन्य भ्रांतियां को दूर करना अति आवश्यक है।उन्होंने कहा कि हमारे देश में कुपोषण एक गंभीर समस्या बन गई है।इसका मुख्य कारण है बढ़ती जनसंख्या और घटते संसाधन।भारत एक विकासशील देश है।यहां पर जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।अगर इस पर रोक नहींलगाई गई तो कुपोषण की समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी। उन्होंने कहा कि कुपोषण के कारण ही लाखों बच्चे प्रत्येक वर्ष मौत के मुंह में चले जाते हैं।जो गरीब आदमी है,वह अच्छे इलाज एवं पौष्टिक भोजन न मिलने के कारण कुपोषण का शिकार होकर असमय ही काल कवलित हो जाते हैं।समाज में महिलाओं को शिक्षित करके ही बढ़ती जनसंख्या पर रोग लगाई जा सकती है।सचिव श्री मौर्य ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अन्य सरकारी विभागों के माध्यम से ग्रामीण अंचल, बालिकाओं की शिक्षा तथा महिलाओं के स्वास्थ्य एवं अधिकार पर काम कर रही है।

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