हत्या के मामले में एक को आजीवन कारावास

विचारण के दौरान दो की हो चुकी है मौत, एक चल रहा फरार
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज।
विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर एक्ट/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम ने राकेश कुमार सिंह ने हत्या के मामले में साक्ष्य के आधार पर अभियुक्त मोहन को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। जबकि मुकदमा विचारण के दौरान दो की मौत हो चुकी है, जबकि एक फरार चल रहा है।
जानकारी के अनुसार कोतवाली मोहम्मदाबाद के आजाद नगर बनपोई निवासी अमरपाल सिंह ने 26 नवंबर 1999 को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें दर्शाया था कि मेरे भाई सर्वेश कुमार व दिनेश कुमार अपने लहसुन के खेत में निकाई कर रहे थे और मैं भी साथ में लहसुन की निकाई करवा रहा था। मेरे खेत से दो खेत की दूरी पर सुघर सिहं पुत्र मुलायम सिंह, सुदामा देवी पत्नी सुघर सिंह व उनका लडक़ा सतीश अपने खेत में धान काट रहे थे। पास में ही उनका गन्ने का खेत है। समय लगभग 12.30 पर दोपहर हुल्ली पुत्र सियाराम, मुकेश पुत्र जगदीश, नरेश पुत्र बलवीर, मोहन पुत्र नामालूम सभी बहेलिया जाति के निवासी आजाद नगर सकवाई मोहम्मदाबाद सुघर सिंह के धान के खेत पर आये और सुघर सिंह से गन्ना मांगा। मना कर देने पर हुल्ली आदि चारों लोगों ने जबरिया गन्ना तोडऩे को तैयार हो गये,तो सतीश ने हम लोगों को आवाज लगायी कि यह लोग गन्ना तोडऩे जा रहे हैं।

आवाज सुनकर मैं अपने दोनों भाइयों के साथ खेत पर पहुंचा और उन लोगों को गन्ना तोडऩे से मना किया। हुल्ली, मोहन, मुकेश, नरेश ने अपनी-अपनी गोट से तमंचा निकालकर हम लोगों को जान से मारने की नियत से फायर किया। जो हमारे भाई सर्वेश की दाहिनी आंख व चेहरे पर व दिनेश कुमार की दाहिने हाथ की हथेली में गोली लगी और सुघर सिंह के सिर में चोट आयी। बचाने के लिए शोर मचाया। आसपास खेतों में काम कर रहे दौडक़र आ गये। जिन्होंने बचाया और घटना देखी। पुलिस ने धारा 323, 504, 506, 307 आई.पी.सी. के तहत अभियुक्तगण हुल्ली, मुकेश, नरेश व मोहन सिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद मेरे भाई सर्वेश की मौत हो गयी। जिसके बाद पुलिस ने धारा 302 की बढ़ोत्तरी मुकदमे में कर दी। मामला सीबीसीआईडी को सौंपा गया। जिसकी विवेचक मनोज कुमार चतुर्वेदी द्वारा की गयी। विवेचक/उप निरीक्षक लक्ष्मी नरायण तथा विवेचना साक्षियों के धारा 161 सी.आर.पी.सी. के बयान दर्ज कराने के उपरांत अभियुक्त मोहन के विरुद्ध वर्ष 2002 में धारा 323, 504, 506, 307, 302 के अपराध में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। अभियुक्त हुल्ली के फरार हो जो जाने के कारण उसकी पत्रावली पृथक कर 299 द0प्र0सं0 के तहत निस्तारित कर दी गयी तथा अभियुक्त मुकेश व नरेश की मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध मुकदमा उपशमित किया जा चुका है। जबकि मोहन पुत्र रतन उर्फ रामपाल पर लगाये गये आरोप में उसे दोष सिद्ध किया गया। अभियुक्त मोहन को धारा 302 के आरोप में आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दण्डित किया गया। धारा 323 के आरोप में एक वर्ष का कठोर कारावास व एक हजार रुपया जुर्माना किया गया। धारा 504 में एक वर्ष का कठोर कारावास व दो हजार रुपया जुर्माना किया गया। धारा 506 में एक वर्ष का कारावास व दो हजार रुपये जुर्माना किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *