प्रहलाद चरित्र और वामन अवतार कथा सुन श्रोता हुए मंत्र मुग्ध

हलिया (मिर्ज़ापुर):हलिया बाजार के गणेश मंदिर के पास चल रही श्रीमद भागवत संगीतमय कथा के तीसरे दिन कथा वाचक ने प्रहलाद चरित्र व वामन अवतार की कथा सुनकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया कथा वाचक पंडित रमाकांत उपाध्याय महराज ने कहा की प्रहलाद एक महान भक्त थे जिन्होंने भगवान विष्णु की भक्ति में अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनकी कहानी वामन अवतार कथा से जुड़ी हुई है, जो भगवान विष्णु के पांचवें अवतार हैं।प्रहलाद का जन्म हिरण्यकशिपु नामक एक असुर राजा के घर हुआ था। हिरण्यकशिपु भगवान विष्णु का कट्टर विरोधी था, लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु के भक्त बन गए। हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रहलाद ने अपने पिता की बात नहीं मानी।
हिरण्यकशिपु ने भगवान विष्णु को मारने के लिए कई उपाय किए, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और हिरण्यकशिपु के पास गए। वामन ने हिरण्यकशिपु से तीन पग भूमि मांगी, जिसे हिरण्यकशिपु ने देने का वचन दिया।वामन ने अपने पहले पग में पूरी पृथ्वी को माप लिया, दूसरे पग में पूरे ब्रह्मांड को माप लिया, और तीसरे पग के लिए हिरण्यकशिपु का सिर मांग लिया। हिरण्यकशिपु ने अपने वचन को पूरा करने के लिए अपना सिर वामन के पैर के नीचे रख दिया। वामन ने हिरण्यकशिपु को मार दिया और प्रहलाद को बचाया।प्रहलाद की कहानी हमें भगवान विष्णु की भक्ति और उनके अवतारों की महिमा बताती है। वामन अवतार कथा हमें वचन के महत्व और भगवान की शक्ति के बारे में बताती है।इस दौरान मुख्य यजमान लक्ष्मण दास सेठ उर्फ़ लल्लू सेठ, श्रोता के रूप में प्रधान संघ अध्यक्ष शिवबाबू सेठ, शिव सोनी, राजकुमार सोनी, अश्विनी सोनी, हर्षित, माधव सेठ, काशी सेठ आदि मौजूद रहे

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